नई दिल्ली : हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 दोनों में तीन प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा और अंत में बाजार भारी नुकसान के साथ बंद हुआ। यह गिरावट पिछले कई महीनों में सबसे बड़ी मानी जा रही है, जिससे निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बन गया।
सेंसेक्स और निफ्टी में ऐतिहासिक गिरावट
30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2,496 अंकों से ज्यादा गिरकर 74,207 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह और भी नीचे जाकर 73,950 तक पहुंच गया था। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 775 अंकों से ज्यादा टूटकर 23,002 पर बंद हुआ। इस तरह की तेज गिरावट जून 2024 के बाद पहली बार देखने को मिली है। बाजार के जानकार इसे अचानक आई वैश्विक और घरेलू चिंताओं का नतीजा मान रहे हैं।
निवेशकों को 11 लाख करोड़ का नुकसान
इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। आंकड़ों के मुताबिक, एक ही दिन में बाजार पूंजीकरण करीब 11.5 लाख करोड़ रुपये घट गया। Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य घटकर लगभग 427 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर पड़ा है और बड़े स्तर पर बिकवाली हुई है।
बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट
सेंसेक्स की लगभग सभी बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इनमें HDFC Bank, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो और बजाज फिनसर्व जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल रहीं। खासतौर पर एचडीएफसी बैंक के शेयर में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण बैंक के अध्यक्ष के अचानक इस्तीफे को माना जा रहा है।
चेयरमैन के इस्तीफे से बढ़ी चिंता
Atanu Chakraborty द्वारा नैतिक कारणों का हवाला देकर इस्तीफा देने से निवेशकों में चिंता और बढ़ गई है। जब किसी बड़े बैंक का शीर्ष अधिकारी इस तरह अचानक पद छोड़ता है, तो बाजार में कंपनी की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगते हैं। यही वजह रही कि निवेशकों ने तेजी से शेयर बेचने शुरू कर दिए।
सोना-चांदी भी गिरे, कीमतों में बड़ी गिरावट
सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि कीमती धातुओं के बाजार में भी गिरावट देखने को मिली। चांदी की कीमत में भारी गिरावट आई और यह 2.33 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। वहीं सोना भी 5,000 रुपये से ज्यादा टूटकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। यह गिरावट निवेशकों की बदलती रणनीति और वैश्विक अनिश्चितता को दर्शाती है।
पश्चिम एशिया में तनाव का असर
वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भी बाजार को प्रभावित किया है। ऊर्जा ठिकानों पर हमलों और गैस उत्पादन क्षेत्रों को निशाना बनाए जाने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता आई है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ देखने को मिला।
विशेषज्ञों की चेतावनी
बाजार विशेषज्ञ Ajay Bagga का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। उनके अनुसार, अगर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो महंगाई बढ़ सकती है और इसका असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ेगा।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक का सख्त रुख
इस बीच Federal Reserve ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है, लेकिन इसके संकेत सख्त माने जा रहे हैं। फेड प्रमुख Jerome Powell ने अनिश्चितता और महंगाई को लेकर चिंता जताई है। इससे वैश्विक निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है और बाजार पर दबाव बना हुआ है।
वैश्विक बाजारों में भी गिरावट
एशिया और यूरोप के बाजारों में भी गिरावट का रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और हांगकांग के प्रमुख सूचकांक नीचे बंद हुए। वहीं यूरोपीय बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि यह सिर्फ घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का असर है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ब्रेंट कच्चा तेल 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो बाजार के लिए एक और चिंता का विषय है। तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे निवेशकों का रुख और सतर्क हो जाता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। वैश्विक तनाव, बड़े बैंकों से जुड़ी खबरें और आर्थिक संकेत—इन सभी ने मिलकर बाजार को दबाव में ला दिया है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और नीतिगत फैसलों पर टिकी रहेंगी। यानी साफ है… बाजार में उतार-चढ़ाव अभी जारी रह सकता है… और निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की जरूरत है।
