नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए अब सोमवार और शुक्रवार को केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करने का फैसला लिया है। अदालत ने यह कदम आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देशों के मुताबिक अब विविध वाद दिवसों पर मामलों की सुनवाई वर्चुअल माध्यम से होगी और रजिस्ट्री को तकनीकी व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रखने के निर्देश दिए गए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई डिजिटल सुनवाई व्यवस्था को अब स्थायी रूप देने की तैयारी की जा रही है।
इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने ईंधन बचाने के लिए साझा वाहन व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई है। सभी न्यायाधीश अब आपसी समन्वय से एक साथ यात्रा करने की व्यवस्था अपनाएंगे, ताकि पेट्रोल और डीजल की खपत कम हो सके। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के कर्मचारियों के लिए भी नया नियम लागू किया गया है, जिसके तहत प्रत्येक शाखा में 50 प्रतिशत कर्मचारी सप्ताह में दो दिन घर से काम कर सकेंगे। हालांकि कर्मचारियों को फोन पर उपलब्ध रहने और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्यालय पहुंचने के निर्देश भी दिए गए हैं।
दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन, साझा वाहन व्यवस्था और सीमित ईंधन उपयोग अपनाने का आग्रह किया था। इसके बाद कई राज्यों और सरकारी संस्थानों ने ऊर्जा बचत को लेकर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
दिल्ली सरकार ने भी सप्ताह में दो दिन घर से काम लागू करने और सरकारी बैठकों को ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। वहीं उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी दफ्तरों में बिजली और ईंधन की बचत को लेकर कई निर्देश जारी किए हैं। सचिवालय और निदेशालय स्तर पर एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखने, जरूरत के अनुसार लिफ्ट इस्तेमाल करने और साझा वाहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में सप्ताह में कम से कम दो दिन घर से काम लागू करने पर जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारत समेत कई देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसे में ईंधन बचत और डिजिटल कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में उठाए जा रहे कदम आने वाले समय में नई कार्यसंस्कृति का हिस्सा बन सकते हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल बदलाव और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
