नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने देश के टेलीकॉम सेक्टर और बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में एक ही दिन में दो बड़े और अहम फैसले किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में जहां कर्ज के बोझ से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया को बड़ी राहत दी गई, वहीं महाराष्ट्र और ओडिशा में सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।
सबसे पहले बात वोडाफोन आइडिया से जुड़े फैसले की करें तो कैबिनेट ने कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी AGR बकाये को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने वोडाफोन आइडिया के 87,695 करोड़ रुपये के AGR बकाये को फ्रीज करने का फैसला किया है। इस राशि को 31 दिसंबर 2025 की स्थिति के अनुसार स्थिर कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस बकाये पर आगे कोई अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा और कंपनी को तुरंत इस रकम का भुगतान नहीं करना होगा।
कैबिनेट से मंजूर इस राहत पैकेज के तहत वोडाफोन आइडिया को फ्रीज किए गए AGR बकाये का भुगतान वित्त वर्ष 2031-32 से लेकर वित्त वर्ष 2040-41 के बीच करना होगा। यानी कंपनी को भुगतान के लिए करीब एक दशक से ज्यादा का समय मिलेगा। हालांकि, राहत के बावजूद कुछ शर्तें बरकरार रखी गई हैं। वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 से संबंधित AGR बकाये के भुगतान की समयसीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह राशि कंपनी को वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच पहले से तय किस्तों में चुकानी होगी।
दूरसंचार विभाग यानी DoT इस AGR बकाये की राशि का दोबारा आकलन करेगा, ताकि आंकड़ों की पूरी तरह से सटीकता सुनिश्चित की जा सके। सरकार के इस फैसले के पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं। फिलहाल केंद्र सरकार वोडाफोन आइडिया में लगभग 49 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरधारक है। ऐसे में यह कदम सरकार के निवेश के मूल्य की रक्षा करने के साथ-साथ देश के टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। सरकार नहीं चाहती कि टेलीकॉम सेक्टर केवल दो बड़ी कंपनियों के वर्चस्व यानी डुओपॉली तक सिमट जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि AGR बकाये के भुगतान में पांच साल से अधिक की अतिरिक्त मोहलत मिलने से वोडाफोन आइडिया के कैश फ्लो में सुधार होगा। इससे कंपनी को नेटवर्क अपग्रेडेशन, 5G रोलआउट और अपनी सेवाओं के विस्तार के लिए जरूरी पूंजी जुटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, जानकार यह भी कह रहे हैं कि कंपनी की लंबी अवधि की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह आने वाले महीनों में नए निवेशकों से कितना फंड जुटा पाती है और अपने औसत प्रति ग्राहक राजस्व यानी ARPU में कितना इजाफा कर पाती है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर 2025 में AGR बकाये के पुनर्मूल्यांकन को सरकार के नीतिगत दायरे में बताया था, जिसके बाद से ही इस तरह की राहत की उम्मीद की जा रही थी। इसी कैबिनेट बैठक में सरकार ने देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए दो बड़ी सड़क परियोजनाओं को भी हरी झंडी दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 20,668 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे महाराष्ट्र और ओडिशा में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा।
कैबिनेट का सबसे बड़ा सड़क संबंधी फैसला महाराष्ट्र के लिए रहा है। यहां 374 किलोमीटर लंबे नासिक–सोलापुर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी गई है। यह एक 6-लेन हाईवे होगा, जिस पर 19,142 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह कॉरिडोर नासिक और सोलापुर जैसे औद्योगिक और कृषि केंद्रों के बीच यात्रा के समय को काफी कम करेगा और लॉजिस्टिक्स को अधिक कुशल बनाएगा। ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होने के कारण यह पूरी तरह नए एलाइनमेंट पर बनेगा, जिससे घनी आबादी वाले इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
इसके अलावा, कैबिनेट ने ओडिशा में सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए 1,526 करोड़ रुपये की परियोजना को भी मंजूरी दी है। इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-326 के 206 किलोमीटर लंबे हिस्से का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। यह परियोजना ओडिशा के आंतरिक और पिछड़े इलाकों में माल ढुलाई को आसान बनाएगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी।
कुल मिलाकर, एक तरफ सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर में संतुलन और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए वोडाफोन आइडिया को बड़ी राहत दी है, तो दूसरी तरफ सड़क कनेक्टिविटी के जरिए आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। ये फैसले आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर दूरगामी असर डाल सकते हैं।
