लेखक
मुहम्मद साजिद
जब गोलियां बर्फ से भी ठंडी और हौसले आग से भी गर्म हों, तभी रचती है सेना इतिहास। 26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को निर्णायक रूप से परास्त किया। मगर, इस विजय की सबसे अहम कड़ी बने, बरेली के जाबांज सपूत। जिन्होंने तिरंगे को 18000 फीट की ऊंचाई पर लहराया और शौर्य की नई परिभाषा लिखी।
बरेली की वीरभूमि और ‘कारगिल चौक’ की गाथा
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बरेली शहर के कैंट में स्थित कारगिल विजय स्थल आज भी यह याद दिलाता है कि इस धरती ने वो सैनिक दिए, जिनकी बहादुरी इतिहास में दर्ज है। यहां हर दिन लोग शहीदों को याद करते हैं, और हर 26 जुलाई को यहां ‘कारगिल विजय दिवस’ की श्रद्धांजलि सभा होती है।
जाट रेजीमेंट की 47 वीर शहादतें, बरेली का गर्व
कारगिल युद्ध में 60 सैनिकों की टुकड़ी में से 47 जवान शहीद हो गए, जो जाट रेजीमेंट सेंटर बरेली से थे। यह बलिदान दिखाता है कि बरेली ने कितनी बड़ी भूमिका इस युद्ध में निभाई।
शहीद पंकज अरोड़ा और हवलदार हरिओम सिंह, बरेली की शान
कैप्टन पंकज अरोड़ा कारगिल में फायरिंग जोन में सबसे आगे रहकर ऑपरेशन को लीड किया, तो वहीं हवलदार हरिओम सिंह ने सियाचिन और द्रास में तैनाती पसंद करने वाले इस जांबाज़ ने ऊंचाई पर दुश्मनों को धूल चटा दी।
बरेली इंजीनियर यूनिट का 80 घंटे में रास्ता बनाना, और ‘बैकबोन ऑफ विजय’
प्रथमेश गुप्ता की यूनिट ने युद्ध के बीच 80 घंटे में दुर्गम पहाड़ियों में रास्ता बनाकर सेना की चढ़ाई संभव की। यह इंजीनियरिंग कौशल भारतीय सेना की रणनीति का हिस्सा बना।
हवलदार कुमार सिंह ने 18000 फीट पर 16 दुश्मन ढेर, और फिर अमरता
कश्मीर के मुश्कोह घाटी में रातभर चढ़ाई के बाद 10 घंटे तक मोर्चा संभालने वाले हवलदार कुमार सिंह ने ‘पिंपल-1’ और ‘पिंपल-2’ पहाड़ियों को फतह किया और शहीद हो गए।
पाकिस्तानी हथियार और स्नो ड्रेस भी लूटे, युद्ध संग्रहालय की विरासत
कारगिल के बाद बरेली लाई गईं घातक पाकिस्तानी मशीनगन, 7 इंच की गोलियों से चलने वाली, आज भी जाट रेजीमेंट के म्यूजियम में रखी हैं। स्नो ड्रेस और पाकिस्तानी फील्ड टेलीफोन भी इसका हिस्सा हैं, जो इस युद्ध की भौतिक गवाही देते हैं। रक्षा मंत्रालय की ऑपरेशन विजय रिपोर्ट, वॉर डायरियों और NDTV और India Today की 1999 की ग्राउंड रिपोर्टिंग के अनुसार, जाट रेजीमेंट की भूमिका को ‘Backbone of Infantry Assault’ कहा गया है।
एक सवाल हर बरेलीवासी से, क्या आपने कारगिल चौक जाकर कभी सर झुकाया है?
बरेली के इन वीरों की गाथा हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। इस विजय की कीमत बहुत बड़ी थी, और इस विजय दिवस पर ज़रूरी है कि हम अपने शहर की इस अद्भुत विरासत को जानें और गर्व करें।
