बरेली : चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। बरेली के बाजार में चीनी का भाव करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आने के बाद प्रशासन ने जमाखोरी और अनावश्यक स्टॉक पर निगरानी बढ़ा दी है। पूर्ति विभाग की टीमों ने चीनी कारोबारियों के गोदामों का निरीक्षण किया। स्टॉक रजिस्टर खंगाले गए और मौके पर मौजूद चीनी की मात्रा का मिलान किया गया। अधिकारियों के मुताबिक जांच के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक नहीं मिला।
4 हजार क्विंटल से ज्यादा स्टॉक पर होगी कार्रवाई

जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार सिंह के मुताबिक चीनी कारोबारियों के लिए अधिकतम 4,000 क्विंटल स्टॉक सीमा निर्धारित की गई है। इससे अधिक चीनी का भंडारण मिलने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। स्टॉक सीमा की निगरानी के लिए पूर्ति निरीक्षकों को लगातार जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मकसद बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने वाली जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाना है, ताकि बढ़ती कीमतों के बीच उपभोक्ताओं को पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध होती रहे।
गोदामों में पहुंची टीम, स्टॉक रजिस्टर से मिलान

स्टॉक सीमा लागू होने के बाद पूर्ति विभाग की टीम ने विभिन्न चीनी कारोबारियों के गोदामों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने रजिस्टर में दर्ज स्टॉक और गोदाम में मौजूद वास्तविक मात्रा का मिलान किया। विभाग के अनुसार अभी तक किसी कारोबारी के यहां 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं मिला है। प्रशासन ने साफ किया है कि आगे भी जांच जारी रहेगी और सीमा का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन बोला- जिले में चीनी की कमी नहीं
जिला पूर्ति अधिकारी ने कहा कि जिले में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है। लोगों से अपील की गई है कि बाजार में चीनी की कमी या कीमतों को लेकर फैलने वाली अफवाहों पर भरोसा न करें। जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर घर या दुकान में अनावश्यक भंडारण करने से भी बचने को कहा गया है। प्रशासन का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि किसी अफवाह या जमाखोरी के कारण बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति न बने।
65 रुपये किलो भाव, व्यापारियों ने मांगी राहत
इधर, चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंच ने सरकार से राहत की मांग की है। संगठन ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपकर गरीब परिवारों को सरकारी राशन की दुकानों के माध्यम से हर महीने पांच किलो चीनी मुफ्त उपलब्ध कराने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि चीनी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तु है। कीमत बढ़ने का सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि पहले से महंगाई की मार झेल रहे परिवारों के लिए चीनी की कीमत में बढ़ोतरी अतिरिक्त बोझ बन गई है।
एथेनॉल नीति पर व्यापारियों ने उठाए सवाल
व्यापार मंच ने चीनी की कीमतों में तेजी के बीच एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। व्यापारियों का दावा है कि चीनी मिलों में एथेनॉल उत्पादन को प्राथमिकता मिलने से चीनी की उपलब्धता और बाजार भाव पर असर पड़ रहा है। हालांकि, चीनी की कीमतों में बदलाव को केवल एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना पूरी तरह उचित नहीं होगा। बाजार भाव पर उत्पादन, गन्ने की उपलब्धता, मिलों की आपूर्ति, मांग, सरकारी नीतियों और बाजार में स्टॉक समेत कई कारकों का प्रभाव पड़ता है।
धनिया, गुड़, खील और बादाम के दाम भी बढ़े
चीनी के अलावा अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी की शिकायतें सामने आई हैं। कारोबारियों के मुताबिक पिछले एक महीने में धनिया करीब 90 से बढ़कर 180 रुपये किलो, गुड़ और बूरा करीब 50-55 से बढ़कर 70 रुपये किलो, खील 80 से बढ़कर 90-95 रुपये किलो और बादाम 920 से बढ़कर करीब 1,120 रुपये किलो तक पहुंच गया है।कारोबारियों के अनुसार परिवहन, पैकेजिंग और आपूर्ति लागत में बढ़ोतरी का असर भी बाजार में दिखाई दे रहा है।
हर महीने 5 किलो मुफ्त चीनी की मांग
व्यापार मंच ने सरकार से मांग की है कि गरीब परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हर महीने पांच किलो चीनी मुफ्त उपलब्ध कराई जाए। संगठन का कहना है कि इससे महंगाई के बीच निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को सीधी राहत मिलेगी। ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष राजेश अग्रवाल, जिला महामंत्री फुरकान शम्सी, जिला कोषाध्यक्ष प्रथमेश गुप्ता, महानगर अध्यक्ष सय्यद गोहर अली, महानगर महामंत्री सतीश भसीन और महानगर कोषाध्यक्ष हरिओम अग्रवाल समेत अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
राहत नहीं मिली तो आंदोलन की चेतावनी
व्यापार मंच ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन किया जाएगा।फिलहाल एक तरफ बाजार में चीनी का भाव 65 रुपये किलो तक पहुंचने की शिकायत है, तो दूसरी तरफ प्रशासन ने जमाखोरी रोकने के लिए 4 हजार क्विंटल की स्टॉक सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में चीनी के बाजार भाव और कारोबारियों के स्टॉक पर प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
