रुहेलखंड कॉलेज परिसर में हुई मारपीट और जानलेवा हमले का मामला
बरेली: एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी परिसर में वर्ष 2015 में हुए जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। लगभग ग्यारह साल पुराने इस केस में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई गई है। यह मामला यूनिवर्सिटी कैंपस में मामूली विवाद के बाद हुई हिंसक मारपीट से जुड़ा है, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था।
फॉर्म की जानकारी लेने गया था युवक, विवाद ने लिया हिंसक रूप
वादी करुणाधर रत्नायके उर्फ करन के अनुसार, 26 दिसंबर 2015 को वह रुहेलखंड यूनिवर्सिटी कैंपस में प्राइवेट फॉर्म से जुड़ी जानकारी लेने गया था। इसी दौरान उसका कंधा पंकज सक्सेना से टकरा गया। इसके बाद पंकज ने गाली-गलौज शुरू कर दी, और विवाद बढ़ गया। शोर सुनकर वहां मौजूद मेरे दोस्त मधुकर यादव और मुकेश यादव ने बीच -बचाव कर मामला शांत कराया।
दोबारा हमला, दोस्त के सिर पर लाठी से वार
कुछ देर बाद जब करन फॉर्म जमा करने जा रहा था, तभी पंकज सक्सेना अपने साथियों के साथ वापस आया और मारपीट शुरू कर दी। जान बचाने के लिए सभी भागने लगे, लेकिन आरोपियों ने मधुकेश यादव को घेर लिया और जान से मारने की नीयत से उसके सिर पर लाठी से हमला कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने से वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
बारादरी थाने में दर्ज हुआ था गंभीर धाराओं में मुकदमा
घटना के संबंध में थाना बारादरी में वर्ष 2015 में मामला दर्ज किया गया था। केस में दंगा, मारपीट, जानलेवा हमला, गाली-गलौज और धमकी जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 9 गवाह अदालत में पेश किए गए।
ADJ कोर्ट का फैसला, तीन आरोपी दोषी करार
अदालत ने आज पंकज सक्सेना, विपिन थापा और अवधेश कुमार को दोषी ठहराया। कोर्ट ने तीनों को हत्या के प्रयास के मामले में 10-10 साल का कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अन्य धाराओं में भी अलग-अलग सजा
अदालत ने दोषियों को मारपीट के मामले में एक-एक साल का कठोर कारावास और जुर्माना, जबकि गाली -गलौज और धमकी के मामलों में दो-दो साल का कठोर कारावास व अर्थदंड से भी दंडित किया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
ग्यारह साल बाद पीड़ित पक्ष को मिला इंसाफ
करीब एक दशक तक चले इस मामले में आए फैसले को पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अदालत के इस निर्णय से यह संदेश गया है कि कॉलेज परिसरों में हिंसा और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को देर-सवेर सजा जरूर मिलती है।
