सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से खुला भ्रष्टाचार का राज, शवों की कीमत 40 हजार से 1.5 लाख तक
बरेली : लावारिस शवों की सौदेबाजी का काला कारोबार अब उजागर हो चुका है। बरेली पुलिस ने इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए सिपाही नरेंद्र प्रताप और जिला अस्पताल के संविदाकर्मी सुनील के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और ऑडियो के सामने आने के बाद की गई। वीडियो में दोनों आरोपियों को लावारिस शवों की कीमत तय करते हुए दिखाया गया था।
एसएसपी ने किया था सस्पेंड
इस मामले को एसएसपी ने गंभीरता से लिया था। उन्होंने सिपाही को तत्काल निलंबित कर दिया, जबकि संविदाकर्मी को अस्पताल से हटा दिया गया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे मंडल तक फैला हुआ है और इसमें कई अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है।
मेडिकल कॉलेजों तक बिक रहे शव
जांच में यह सामने आया है कि पुलिस और अस्पताल कर्मियों से जुड़ा एक सिंडिकेट लावारिस शवों को मेडिकल कॉलेजों तक बेचता था। एक शव की कीमत 40 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक तय होती थी। मेडिकल कॉलेज इन शवों का उपयोग डॉक्टरी की पढ़ाई, रिसर्च और अन्य प्रयोगों में करते थे। सरकारी नियमों के अनुसार लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए जो अनुदान दिया जाता है। उसे भी आरोपी हड़प लेते थे। इस तरह दोहरी कमाई का खेल वर्षों से चल रहा था।
पूरे मंडल में सक्रिय नेटवर्क
सूत्रों ने बताया कि यह नेटवर्क सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के जिलों में भी सक्रिय है। शवों की सौदेबाजी के साथ-साथ सरकारी रकम में हेराफेरी भी की जाती थी। पुलिस ने आशंका जताई है कि एफआईआर के बाद इस सिंडिकेट से जुड़े कई अन्य लोग सामने आ सकते हैं। एसएसपी ने कहा, हम इस मामले की हर पहलू से जांच कर रहे हैं। जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।
कानूनी और नैतिक पहलू
इस घिनौने कृत्य ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लावारिस शवों का दुरुपयोग न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह इंसानियत के खिलाफ भी अपराध है। सरकारी नियमों के तहत शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए, न कि उन्हें मुनाफ़े के लिए बेचा जाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से समाज में विश्वास की कमी आती है और प्रशासन की साख को भी नुकसान पहुँचता है।
जानें अब आगे की कार्रवाई
पुलिस ने शवों की बिक्री में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए विशेष टीम गठित की है। अस्पतालों, पुलिस चौकियों और मेडिकल कॉलेजों में कड़ी जांच की जा रही है। एसएसपी ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस काले कारोबार को जड़ से समाप्त किया जाएगा।
