कुतुबखाना सब्जी मंडी से वसूली थी रकम, तीन नोटिस के बावजूद आरोपी फरार
बरेली : नगर निगम की राजस्व व्यवस्था में एक बार फिर गंभीर लापरवाही और आर्थिक गड़बड़ी का मामला सामने आया है। शहर की कुतुबखाना सब्जी मंडी से भू-प्रयोग शुल्क की वसूली कर उसे नगर निगम कोष में जमा न कराने के आरोप में मंडी ठेकेदार पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है। ठेकेदार ने 5 लाख 28 हजार रुपये की वसूली, तो कर ली, लेकिन तय समय सीमा में निगम कोष में राशि जमा नहीं की। अब ठेकेदार फरार बताया जा रहा है और नगर निगम प्रशासन एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में जुट गया है
21 फरवरी 2025 को मिला था मंडी का ठेका
नगर निगम के राजस्व प्रभारी राजीव कुमार राठी ने बताया कि पुराना शहर निवासी कफील खान को 21 फरवरी 2025 से 20 फरवरी 2026 तक के लिए कुतुबखाना सब्जी मंडी का ठेका आवंटित किया गया था। ठेका शर्तों के अनुसार, ठेके की कुल धनराशि का 75 प्रतिशत हिस्सा तीन समान किस्तों में तय समय के भीतर नगर निगम कोष में जमा करना अनिवार्य था।
वसूली हुई, लेकिन खजाने तक नहीं पहुंचा पैसा
आरोप है कि ठेकेदार ने मंडी में दुकानदारों और व्यापारियों से भू-प्रयोग शुल्क की वसूली तो कर ली, लेकिन अब तक 5.28 लाख रुपये नगर निगम कोष में जमा नहीं किए गए। इससे निगम के राजस्व को सीधा नुकसान पहुंचा है। इतना ही नहीं, ठेका शर्तों का उल्लंघन करते हुए ठेकेदार ने चरित्र प्रमाण पत्र, अनुबंध से संबंधित स्टांप पेपर,
भी निगम कार्यालय में जमा नहीं कराए।
तीन नोटिस के बाद भी नहीं दिया जवाब
मामले के सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने ठेकेदार को तीन बार नोटिस जारी किए, लेकिन न तो किसी नोटिस का संतोषजनक जवाब दिया गया और न ही बकाया रकम जमा की गई। नोटिस के बाद से ही ठेकेदार लापता/फरार बताया जा रहा है।
FIR और ठेका निरस्तीकरण की तैयारी
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धन की हेराफेरी और ठेका शर्तों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जा रहा है। एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है,
ठेका निरस्त करने,और बकाया राशि की रिकवरी के लिए भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक, दस्तावेजी जांच पूरी होते ही पुलिस में मामला दर्ज कराया जाएगा।
सवालों के घेरे में निगरानी व्यवस्था
इस पूरे मामले ने नगर निगम की ठेका निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि इतनी बड़ी रकम की वसूली के बावजूद समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
