अधिवक्ता गजेंद्र सिंह यादव
हाईकोर्ट वकील की शिकायत पर NHRC की कार्रवाई, बरेली बवाल केस फिर चर्चा में!
लखनऊ/प्रयागराज/बरेली : यूपी के बरेली में 26 सितंबर 2025 को “I Love Muhammad” पोस्टर विवाद के बाद बरेली में हुए बवाल पर मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. गजेन्द्र सिंह यादव की शिकायत पर आयोग ने एडीजीपी, बरेली जोन को जांच और कार्रवाई के आदेश दिए हैं। शिकायत में फर्जी मुठभेड़, बुलडोज़र कार्रवाई, इंटरनेट बंदी और नागरिक अधिकारों के हनन जैसे आरोप शामिल हैं। आयोग ने कहा “कानून के अनुसार जांच करें।
बरेली बवाल के बाद पुलिस कार्रवाई ने कई मौलिक अधिकारों का किया उल्लंघन : अधिवक्ता गजेंद्र सिंह
बरेली में “I Love Muhammad” पोस्टर को लेकर बवाल हुआ था। पुलिस का आरोप है कि बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ एकत्र हुई, और पुलिस पर पथराव कर हमला किया। इसके साथ ही आंसू गैस गन और बाकी टॉकी आदि पुलिस कर्मियों से छीन लिए थे। बवाल के भड़की हिंसा के मामले में मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग ने अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी), बरेली जोन को शिकायत की जांच कर आवश्यक विधिक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर हुई है।
पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप में शिकायत
शिकायत में अधिवक्ता डॉ. गजेन्द्र सिंह यादव ने आरोप लगाया कि बरेली हिंसा के बाद की पुलिस कार्रवाई ने कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया। शिकायत में चार प्रमुख बिंदु उठाए गए हैं। अधिवक्ता गजेंद्र सिंह यादव ने “The Justice Hindi” को बताया कि शिकायत में कहा गया कि आरोपी ताजिम को कथित रूप से पुलिस मुठभेड़ में घायल या गिरफ्तार दिखाया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार) का उल्लंघन है। बिना पूर्व नोटिस और सुनवाई के आरोपियों की संपत्तियों को बुलडोज़र से ध्वस्त किया गया, जो अनुच्छेद 300A (संपत्ति के अधिकार) का हनन है। बवाल के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा और जीवन की रक्षा में प्रशासन विफल रहा। इसके साथ ही बवाल के बाद प्रशासन ने इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क सेवाएं निलंबित कर दीं। जिसके चलते नागरिकों का सूचना और संवाद का अधिकार (Right to Information & Expression) प्रभावित हुआ।
मानवाधिकार आयोग की कार्यवाही, और ऑनलाइन सुनवाई
शिकायत की सुनवाई ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की गई। अधिवक्ता ने बताया कि आयोग ने सभी बिंदुओं का अवलोकन करते हुए कहा कि “शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए यह उपयुक्त होगा कि शिकायत की प्रति अपर पुलिस महानिदेशक, बरेली जोन को भेजी जाए। वे स्वयं मामले की जांच करें और विधि अनुसार आवश्यक कार्रवाई करें।” इसके साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि “मैंने शिकायत के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई मत व्यक्त नहीं किया है। यह आदेश केवल जांच और तथ्यपरक रिपोर्ट सुनिश्चित करने हेतु पारित किया जा रहा है।”आयोग ने इन टिप्पणियों के साथ शिकायत को अंतिम रूप से निस्तारित (disposed of) कर दिया।
शिकायतकर्ता बोले- मानवाधिकार की रक्षा ही न्याय का पहला कदम
शिकायतकर्ता डॉ. गजेन्द्र सिंह यादव (एडवोकेट, हाई कोर्ट इलाहाबाद) ने कहा कि “यह आदेश न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कानून का शासन तभी मजबूत होगा जब प्रशासनिक कार्रवाइयों में भी मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए।”
जानें बरेली बवाल का पूरा मामला
यूपी के कानपुर में ईद मिलादुन्नबी के दौरान “I Love Muhammad” लिखे एक पोस्टर को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद ही देश भर में एक समुदाय के लोगों ने विरोध किया। इसी को लेकर आइएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने 26 सितंबर की बरेली में ज्ञापन देने का ऐलान किया। इस कार्यक्रम की प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी। धारा 163 और त्योहारों के चलते पुलिस ने भी कार्यकम न करने को कहा था। मगर, इसके बाद भी जुमा नमाज के बाद लोग पहुंच गए थे। पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने नारेबाजी कर माहौल बिगाड़ा था। इस मामले में पुलिस ने 11 मुकदमें दर्ज किए थे। इसमें से 7 में मौलाना तौकीर रजा खान का नाम शामिल है।
फतेहगढ़ जेल में मौलाना तौकीर रजा
पुलिस के मुताबिक बवाल के मुख्य आरोपी आइएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां हैं। उनको पुलिस ने अगले ही दिन गिरफ्तार कर फतेहगढ़ जेल में भेज दिया है। इसके साथ ही उनके करीबी डॉक्टर नफीस,पूर्व जिलाध्यक्ष नदीम खां, फरहत खां, जिलाध्यक्ष शमशाद हुसैन समेत 100 से अधिक लोगों को जेल भेज चुकी है। इसके अलावा डॉ.नफीस का अवैध रूप से निर्मित शादी हाल बुलडोजर से ध्वस्त किया जा चुका है, तो वहीं दर्जन भर से अधिक भवन, मार्केट और शादी हाल को सील किया जा चुका है।
