नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की सप्लाई में आ रही बाधाओं की आहट भारत तक भी पहुंचने लगी है। देश के कई बड़े शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी की खबरों ने होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की चिंता बढ़ा दी है।
जानकारी के मुताबिक चेन्नई, मुंबई और बंगलूरू जैसे बड़े शहरों में कई होटल और रेस्टोरेंट गैस की कमी के कारण प्रभावित हो रहे हैं। उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि कई जगह गैस की नियमित सप्लाई बाधित हो रही है, जिससे रसोई चलाना मुश्किल हो रहा है और कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के प्रमुख संगठन Federation of Hotel and Restaurant Associations of India (एफएचआरएआई) ने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
एफएचआरएआई ने अपने पत्र में कहा है कि जमीनी स्तर पर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई में भारी रुकावट आ रही है। कई गैस डिस्ट्रीब्यूटर 5 मार्च के एक कथित सरकारी आदेश का हवाला देते हुए होटल और रेस्टोरेंट को सिलेंडर देने से मना कर रहे हैं। इससे होटल और फूड सर्विस सेक्टर के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
संगठन के महासचिव जैसन चाको का कहना है कि सरकार को इस मामले में तुरंत स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए। उन्होंने मांग की है कि सरकार यह साफ करे कि होटल और फूड सर्विस सेक्टर के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर किसी तरह की रोक नहीं है। साथ ही ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भी निर्देश दिए जाएं कि वे बिना किसी रुकावट के सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करें।
वहीं रेस्टोरेंट उद्योग के एक अन्य प्रमुख संगठन National Restaurant Association of India (एनआरएआई) ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि कई गैस सप्लायर रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की मांग पूरी करने में असमर्थता जता रहे हैं, जिससे कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। एनआरएआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भले ही सरकार ने स्पष्ट किया हो कि रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के लिए कमर्शियल एलपीजी सप्लाई पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई दे रही है। संगठनों का कहना है कि होटल और रेस्टोरेंट लोगों को भोजन उपलब्ध कराने जैसी आवश्यक सेवा से जुड़े हैं। ऐसे में गैस की कमी का असर सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव आम नागरिकों तक भी पहुंच सकता है।
