बरेली : यूपी के बरेली औद्योगिक क्षेत्र सीबीगंज स्थित सुपीरियर शराब निर्माण इकाई (डिस्टलरी) में आयकर विभाग की कार्रवाई तीसरे दिन भी जारी रही। मंगलवार देर रात शुरू हुई जांच 48 घंटे बाद भी नहीं थमी है। गुरुवार को भी टीम फैक्ट्री परिसर में डेरा डाले हुए है और वित्तीय दस्तावेजों से लेकर डिजिटल डाटा तक की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
बिल, वाउचर और स्टॉक रजिस्टर का मिलान
सूत्रों के अनुसार, प्रिंटेड बिल, वाउचर, स्टॉक रजिस्टर और टैक्स से संबंधित फाइलों का आपस में मिलान किया जा रहा है। विभाग कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े इनपुट के आधार पर लेनदेन की कड़ियां जोड़ रहा है। डिजिटल डाटा की फॉरेंसिक जांच के जरिए ई -रिकॉर्ड, अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर एंट्री और बैंकिंग ट्रेल की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, विभाग की ओर से अब तक किसी गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
मोबाइल फोन जांच के दायरे में
जानकारी के मुताबिक, फैक्ट्री के संचालक, प्रबंधक और कुछ जिम्मेदार पदाधिकारियों के मोबाइल फोन भी जांच के दायरे में लिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि संभावित कर अनियमितताओं से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा सकें। परिसर में पुलिस और पीएसी की मौजूदगी बनी हुई है। बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक है, जबकि कर्मचारियों को सीमित रूप से काम करने की अनुमति दी गई है।
उत्पादन जारी, लेकिन रफ्तार धीमी
कार्रवाई के बीच उत्पादन पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। मगर, माल की आवाजाही में कमी बताई जा रही है। कर्मचारियों के अनुसार, फैक्ट्री से तैयार माल की ढुलाई कम हुई है, और कच्चे माल की आपूर्ति भी सीमित है। प्रबंधन “फूंक-फूंक कर” कदम उठा रहा है।
औद्योगिक संगठनों ने साधी चुप्पी
शहर के औद्योगिक और व्यापारिक संगठनों ने इस मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी से परहेज किया है। कुछ उद्यमियों ने अनौपचारिक रूप से कहा कि आयकर से जुड़े मामलों पर बोलना उचित नहीं है।कारोबारी हलकों में हालांकि चर्चा तेज है और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
