बरेली : यूपी के बरेली कोर्ट ने शुक्रवार को तीन गंभीर आपराधिक मामलों में फैसला सुनाते हुए दोषियों को कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इन मामलों में सड़क पर हुए विवाद के बाद मौत, घर में घुसकर धारदार हथियार से हमला और गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामला शामिल है। लंबे समय से चल रहे इन केसों में अदालत के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष को राहत मिली है।
तांगा सड़क पर खड़ा करने के विवाद में हुई थी मौत
पहला मामला शहर के थाना बारादरी क्षेत्र के संजयनगर मोहल्ले का है। वादी सर्वेश कुमार के मुताबिक 4 जुलाई 2020 को मोहल्ले का रहने वाला रेशमपाल अपना घोड़ा तांगा सड़क पर खड़ा कर रहा था। मना करने पर दोनों पक्षों में विवाद हो गया और गाली-गलौज के बाद मारपीट शुरू हो गई। इस दौरान बीच-बचाव करने आए दुर्गाप्रसाद के सिर में डंडा लग गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान 7 जुलाई 2020 को उनकी मौत हो गई थी। मामले में कोर्ट ने आरोपी रेशमपाल निवासी संजयनगर को धारा 304 में तीन वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं धारा 323 में एक वर्ष के कारावास से भी दंडित किया गया। हालांकि सह आरोपी जसवीर सिंह और योगेंद्र को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।
घर में घुसकर किया धारदार हथियार से हमला
दूसरा मामला थाना देवरनिया क्षेत्र के ग्राम बिहारीपुर का है। रेखा के अनुसार 14 जुलाई 2022 की रात पड़ोसी ओमपाल उर्फ छेदालाल उनके घर में घुस आया और बरामदे में सो रहे उनके पति बुद्धसेन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। आरोपी घायल अवस्था में उन्हें घर से बाहर खींचकर ले जाने की कोशिश कर रहा था, तभी शोर सुनकर परिवार के लोग जाग गए और आरोपी जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गया। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी ओमपाल उर्फ छेदालाल निवासी ग्राम बिहारीपुर को धारा 308 में पांच वर्ष, धारा 452 में चार वर्ष और धारा 324 में दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर कुल 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
लूट और चोरी के गिरोह में शामिल आरोपी को गैंगस्टर एक्ट में सजा
तीसरा मामला थाना भोजीपुरा क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार आरोपी सईम उर्फ सीमा निवासी ग्राम मुरारपुर संगठित गिरोह बनाकर लूट, चोरी और नकबजनी जैसी घटनाओं में शामिल था और अवैध तरीके से आर्थिक लाभ कमाता था। इस मामले में कोर्ट ने आरोपी को गैंगस्टर एक्ट की धारा 2/3 में दोषी करार देते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना जमा न करने पर अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
गवाहों और सबूतों के आधार पर अदालत ने सुनाया फैसला
तीनों मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में गवाह और साक्ष्य पेश किए गए। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। वर्षों पुराने मामलों में आए इन फैसलों को कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के लिहाज से अहम माना जा रहा है।