बिना नोटिस बुलडोजर कार्रवाई पर रोक… हाईकोर्ट ने कहा-पहले वैधानिक प्रक्रिया पूरी करें, फिर आगे बढ़ें
बरेली : शहर के सूफीटोला स्थित एवान-ए-फरहत बरातघर पर हुई अचानक बुलडोजर कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को बड़ी राहत देते हुए डेढ़ माह (45 दिन) की रोक लगा दी है। यह बरातघर समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आज़म खां के करीबी सपा नेता सरफराज वली खां का है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि न कोई नोटिस मिला, न बुलडोजर चलाने का वैध आदेश दिखाया गया, और बीडीए ने भारी पुलिस बल के साथ अचानक कार्रवाई कर दी।
कोर्ट ने कहा-“नियमन और कंपाउंडिंग का पूरा अवसर दिया जाए”
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बरातघर संचालक 15 दिन के भीतर कंपाउंडिंग का आवेदन देंगे। बीडीए 6 सप्ताह में आवेदन का निस्तारण करेगा। इस दौरान संपत्ति पर यथास्थिति बनी रहेगी,और बीडीए किसी भी तरह की बुलडोजर कार्रवाई नहीं करेगा। यह आदेश संचालक के लिए फिलहाल एक बड़ी राहत माना जा रहा है।
याचिकाकर्ता का आरोप: “2011 का आदेश कभी दिखाया नहीं गया”
बरातघर संचालक के अधिवक्ता वैभव माथुर ने कोर्ट में कहा कि बीडीए 2011 के एक आदेश का हवाला दे रहा था,लेकिन वह आदेश न संचालक को दिखाया गया, न कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर गंभीरता जताई। बीडीए ने दलील दी कि “नक्शा पास नहीं, नोटिस भेजे थे”। उन्होंने कहा बरातघर बिना स्वीकृत नक्शे के चल रहा था। 2011 में नोटिस जारी किए गए थे लेकिन जवाब नहीं मिला। हाईकोर्ट के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन किया जाएगा। संयुक्त सचिव ने मीडिया से कहा कि 15 दिन के भीतर कंपाउंडिंग आवेदन आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
