बिना स्वीकृति कर रहे थे प्लॉटिंग और निर्माण, बीडीए की सख्त चेतावनी, मानचित्र के बिना कोई भी कॉलोनी नहीं बचेगी!
बरेली : यूपी के बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) ने गुरुवार को शहर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना सीबीगंज क्षेत्र में दो अवैध कॉलोनियों पर बुलडोज़र चलवा दिया। करीब 120 बीघा जमीन पर बिना स्वीकृति के बनाई जा रही कॉलोनियों को प्रवर्तन टीम ने जमींदोज़ कर दिया।प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की सुसंगत धाराओं के तहत की गई।
ग्राम बंडिया में 100 बीघा पर चल रहा था अवैध विकास
प्रवर्तन टीम के अनुसार, अमित अग्रवाल उर्फ राजा और कमल बेदी उर्फ सोनू पंजाबी द्वारा थाना सीबीगंज के ग्राम बंडिया में लगभग 100 बीघा क्षेत्रफल में बिना बीडीए की अनुमति के भूखंडों का चिन्हांकन, सड़क, नाली और बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा था, जबकि न तो कॉलोनी का कोई स्वीकृत नक्शा था और न ही विकास प्राधिकरण की अनुमति थी। प्राधिकरण ने मौके पर पहुंचकर कॉलोनी में की जा रही प्लॉटिंग और निर्माण को ध्वस्त कर दिया।
ग्राम टयूलिया में 20 बीघा पर कब्जे का खेल
इसके साथ ही दूसरी कार्रवाई ग्राम टयूलिया थाना सीबीगंज में की गई, जहां बाबू राम, संजीव, वीरेन्द्र और रविन्द्र नामक व्यक्तियों द्वारा लगभग 20 बीघा क्षेत्रफल में बिना स्वीकृति के कॉलोनी विकसित की जा रही थी।
यहां भी भूखंडों का चिन्हांकन,सड़क, नाली और बाउंड्रीवाल का कार्य जारी था, जिसे प्रवर्तन टीम ने ध्वस्त कर दिया।
प्रवर्तन टीम की मौजूदगी में चला बुलडोज़र
कार्रवाई का नेतृत्व सहायक अभियंता धर्मवीर सिंह और अवर अभियंता संदीप कुमार ने किया। उनके साथ प्रवर्तन टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण पर बुलडोज़र चलाया।अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी अवैध प्लॉटिंग या निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा।
बीडीए की चेतावनी-“बिना मानचित्र स्वीकृति निर्माण पूरी तरह अवैध”
प्राधिकरण ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी भवन या भूखंड की खरीद से पहले उसकी मानचित्र स्वीकृति की जांच अवश्य करें। बिना स्वीकृत मानचित्र के की गई प्लॉटिंग या निर्माण पूरी तरह अवैध है और किसी भी समय ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। प्राधिकरण की चेतावनी साफ है कि “भविष्य में किसी परेशानी से बचने के लिए क्रेता खरीदारी से पहले बीडीए से जानकारी लें। बिना स्वीकृति के निर्माण करने वालों के खिलाफ अधिनियम 1973 के तहत सख्त कार्रवाई होगी। जिसका पूरा जिम्मा निर्माणकर्ता का स्वयं का होगा।”
