2027 से पहले सियासी सेमीफाइनल! दोनों विधानसभा सीट पर सबकी निगाह
बरेली/मऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस वक्त हलचल तेज़ हो गई है। एक के बाद एक दो विधानसभा सीटों के खाली होने से प्रदेश में उपचुनाव की आहट साफ सुनाई देने लगी है। मऊ ज़िले की घोसी विधानसभा सीट के बाद अब बरेली ज़िले की फरीदपुर विधानसभा सीट भी रिक्त हो गई है। जिससे सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। बरेली की फरीदपुर सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल के आकस्मिक निधन के बाद यह सीट खाली हुई है। उनके निधन के बाद न सिर्फ स्थानीय राजनीति में शोक की लहर है, बल्कि राजनीतिक दलों ने भी आने वाले उपचुनाव की रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है।
क्यों अहम है फरीदपुर विधानसभा सीट?

फरीदपुर विधानसभा सीट बरेली ज़िले की आरक्षित सीट है और यहां का चुनावी इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां मुकाबला बेहद कांटे का रहा था, जहां समाजवादी पार्टी को मात्र 2,921 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। सपा उम्मीदवार विजय पाल सिंह को मिले थे 89,149 वोट (43.78%), और भाजपा उम्मीदवार डॉ. श्याम बिहारी लाल को मिले 92,070 वोट (45.22%), बसपा की शालिनी सिंह को मिले 14,478 वोट, एलकेडी के अमीश सागर को 1,759 वोट, कांग्रेस प्रत्याशी विशाल सागर को 1,744 वोट NOTA को पड़े 1,532 वोट।
डॉ. श्याम बिहारी लाल का सियासी सफर खास

दुनिया को अलविदा कहने वाले भाजपा विधायक डॉक्टर श्याम बिहारी लाल का राजनीतिक सफर भी खास रहा। वे 2017 और 2022 में लगातार दो बार विधायक बने और फरीदपुर सीट से ऐसा करने वाले पहले नेता थे। 2017 के चुनाव में उन्होंने सपा उम्मीदवार सियाराम सागर को 24,721 वोटों से हराया था, जबकि बसपा तीसरे स्थान पर रही थी।
घोसी सीट पर पहले से सियासी तैयारी
मऊ ज़िले की घोसी विधानसभा सीट दिसंबर 2025 में विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद से खाली है। सपा और भाजपा से जल्द प्रत्याशी घोषित होने की उम्मीद है। हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक घोसी या फरीदपुर, किसी भी सीट पर उम्मीदवार को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल

क्या सपा फरीदपुर में 2022 की मामूली हार का बदला ले पाएगी?। क्या भाजपा दोनों सीटों पर अपनी पकड़ बरकरार रख पाएगी? या फिर बसपा और अन्य दल समीकरण बिगाड़ने में सफल होंगे? राजनीतिक जानकारों की मानें तो घोसी और फरीदपुर का उपचुनाव 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक तरह का “राजनीतिक सेमीफाइनल” साबित हो सकता है। यही वजह है कि सभी दल इन सीटों पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में जुट गए हैं। फिलहाल चुनाव आयोग की औपचारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति और ज़्यादा गर्म होने वाली है।
