814वें उर्स में शिरकत को दरगाह ताजुश्शरिया से चादर रवाना, सड़क मार्ग से रवाना हुए अकीदतमंद,मुफ्ती असजद मियां की ख़ास चादर होगी पेश
बरेली : हजरत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी के 814वें उर्स में शिरकत के लिए बरेली से अकीदत, मोहब्बत और कौमी एकता का संदेश लेकर एक बड़ा काफिला गुरुवार को अजमेर शरीफ के लिए रवाना हुआ। यह काफिला दरगाह ताजुश्शरिया से जमात रज़ा मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां के नेतृत्व में सड़क मार्ग से निकला। यहां हर कदम पर “ख़्वाजा का पैगाम-अमन और भाईचारा” की गूंज सुनाई दी।
कौमी एकता की जिंदा मिसाल
रवाना होने से पहले फरमान मियां ने कहा कि अजमेर शरीफ का आस्ताना कौमी एकता की जिंदा मिसाल है, जहां मज़हब, जाति और ऊंच-नीच की तमाम दीवारें अपने आप गिर जाती हैं। उन्होंने कहा कि ख़्वाजा गरीब नवाज़ का दर इंसानियत का पैगाम देता है, जहां अमीर-गरीब, हर तबके के लोग अपनी मुरादें लेकर हाज़िर होते हैं। यही वजह है कि हर साल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से अकीदतमंद उर्स में शिरकत के लिए अजमेर शरीफ पहुंचते हैं।
मुल्क के अमन को मांगी दुआएं
फरमान मियां ने बताया कि 27 दिसंबर को कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। जिसमें मुल्क की तरक्की, अमन-चैन, आपसी भाईचारे और खुशहाली के लिए ख़ास दुआएं की जाएंगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में नफरत और बंटवारे के बीच सूफी संतों की तालीम पहले से ज्यादा अहम हो गई है। क्योंकि, यही तालीम समाज को जोड़ने का काम करती है।इस अवसर पर क़ाज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रज़ा क़ादरी (असजद मियां) की ओर से भेजी गई ख़ास चादर भी फरमान मियां अपने साथ लेकर रवाना हुए। यह चादर सूफियाना रिवायत, मोहब्बत और देश में अमन के पैगाम की प्रतीक मानी जा रही है, जिसे अजमेर शरीफ में ख़्वाजा गरीब नवाज़ की दरगाह पर पेश किया जाएगा।
बरेली में भी ख्वाजा साहब के उर्स को उत्साह
अजमेर शरीफ में ख्वाजा साहब के उर्स को लेकर बरेली में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में अकीदतमंद अजमेर शरीफ के लिए रवाना हो चुके हैं। हर जुबान पर एक ही दुआ है-देश में अमन, तरक्की और खुशहाली कायम रहे। उर्स के रंग जैसे-जैसे गहराएंगे, बरेली से गया यह काफिला भी ख़्वाजा की चौखट पर हाज़िरी देकर भाईचारे और कौमी एकता का पैगाम देगा। इस काफिले में मोहम्मद जुनैद रज़ा, साकिब ख़ान, मुज़फ़्फ़र अली, अली रज़ा, शोएब ख़ान, ज़ुल्फ़िकार अहमद, यासिन अली, यूनुस अली, मोईन अहमद और शारुख ख़ान समेत कई अकीदतमंद शामिल है। अजमेर उर्स एक बार फिर साबित करेगा कि सूफी दरगाहें मोहब्बत, इंसानियत और राष्ट्रीय एकता की सबसे मजबूत पहचान हैं।
