बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में शिक्षकों को भूसा जुटाने का आदेश देने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। शिक्षकों और शिक्षक संगठनों के विरोध के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. विनीता ने नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सत्यदेव को कारण बताओ नोटिस जारी कर तलब कर लिया है।विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब सोशल मीडिया पर एक पत्र तेजी से वायरल हुआ, जिसमें विकास खंड के प्रत्येक विद्यालय को 46 किलोग्राम भूसा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। आदेश सामने आने के बाद शिक्षक संगठनों ने इसे शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बताते हुए विरोध शुरू कर दिया।
जानें क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, जिले में निराश्रित और बेसहारा गोवंश के भरण-पोषण के लिए स्वैच्छिक भूसा दान अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीबीओ) और जिलाधिकारी (डीएम) बरेली के निर्देशों के अनुपालन में शुरू किया गया था। अभियान के तहत विभिन्न विभागों और समाज के सक्षम लोगों को स्वेच्छा से भूसा दान के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी क्रम में 20 मई को जारी पत्र में नवाबगंज विकास खंड को 100 कुंतल भूसा एकत्र करने का लक्ष्य दिया गया था। खंड शिक्षा अधिकारी को अपने स्तर से सहयोग जुटाने और क्षेत्र के सम्मानित नागरिकों व पशुपालन विभाग के अधिकारियों के माध्यम से स्वैच्छिक दान के लिए प्रेरित करने को कहा गया था।
बीईओ पर मनमाना आदेश जारी करने का आरोप
आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी सत्यदेव ने स्वैच्छिक अभियान को अनिवार्य आदेश का रूप दे दिया।उन्होंने अपने कार्यालय से एक नया आदेश जारी करते हुए विकास खंड के प्रत्येक विद्यालय से 46 किलो भूसा उपलब्ध कराने का निर्देश जारी कर दिया। यह आदेश सामने आते ही शिक्षकों और शिक्षक संगठनों में नाराजगी फैल गई। शिक्षकों का कहना था कि शिक्षा विभाग का काम शिक्षण व्यवस्था संभालना है, न कि भूसा जुटाना। मामले ने सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ लिया और विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे।
बीएसए ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
विवाद बढ़ने के बाद बीएसए डॉ. विनीता ने सख्त रुख अपनाते हुए बीईओ सत्यदेव को नोटिस जारी किया है। बीएसए ने आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि भूसा दान पूरी तरह स्वैच्छिक अभियान है और किसी भी शिक्षक या विद्यालय पर दबाव नहीं बनाया जा सकता। बीईओ को निर्देश दिया गया है कि वे आम जनता, सक्षम लोगों और सामाजिक संगठनों से संपर्क कर स्वैच्छिक दान के लिए प्रेरित करें। इसके अलावा उनसे पूरे मामले पर तत्काल तथ्यात्मक स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
विभागीय कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, विभाग अब बीईओ को संबद्ध करने की तैयारी में है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। बीएसए ने साफ किया है कि किसी भी स्वैच्छिक अभियान को जबरन आदेश में बदलना और शिक्षकों पर दबाव बनाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही पुराने आदेश के अनुपालन में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी तलब की गई है।
