रामपुर : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ दर्ज भड़काऊ भाषण से जुड़े एक मामले में बृहस्पतिवार को बड़ा फैसला आया। एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने साक्ष्यों के अभाव में आजम खां को इस मुकदमे से बरी कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और समर्थकों में राहत की भावना देखी जा रही है।
यह मामला दो अप्रैल 2019 का है, जब आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता फैसल खान लाला ने रामपुर शहर कोतवाली में आजम खां के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आजम खां ने एक जनसभा के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था और लोगों को तत्कालीन जिलाधिकारी समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ उकसाया था। इस बयान को लेकर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया था, क्योंकि उस समय लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू थी।
एफआईआर में आजम खां पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच के बाद आरोपों को सही मानते हुए उनके खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। इसके बाद यह मामला एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में सुनवाई के लिए चला, जहां लंबे समय तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।
अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में यह साबित करने का प्रयास किया गया कि आजम खां के भाषण से प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ जनता को भड़काने की कोशिश की गई थी। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि भाषण को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और इसके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आजम खां के बयान राजनीतिक भाषण का हिस्सा थे और उनमें किसी प्रकार की आपराधिक मंशा नहीं थी।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने यह माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर कोर्ट ने आजम खां को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। फैसले के बाद आजम खां के समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस निर्णय को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
