नई दिल्ली : भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर और दिग्गज गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली और इस दुनिया को अलविदा कह दिया। करीब सात दशकों तक अपनी मधुर और अनोखी आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली इस महान गायिका के निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके जाने से संगीत की दुनिया में एक ऐसा खालीपन पैदा हो गया है, जिसे भर पाना बेहद मुश्किल है।
अस्पताल में चल रहा था इलाज, नहीं बच सकीं
जानकारी के मुताबिक, शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद आशा भोसले को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज यूनिट में रखा गया, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी। दुनियाभर में फैले उनके फैंस उनकी सलामती के लिए दुआ कर रहे थे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद रविवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। इस खबर की पुष्टि उनके बेटे आनंद भोसले ने की है।
सीने में संक्रमण बना मौत की वजह
परिवार के मुताबिक, आशा भोसले को अत्यधिक थकावट और सीने में संक्रमण की शिकायत थी। उनकी पोती जनाई भोसले ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया था कि उनकी हालत गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फैंस लगातार उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे थे, लेकिन उनकी यह उम्मीद टूट गई।
अस्पताल और घर के बाहर उमड़ी फैंस की भीड़
जैसे ही आशा भोसले की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई, उनके घर और अस्पताल के बाहर फैंस की भारी भीड़ जमा होने लगी। हर कोई उनकी एक झलक पाने और उनके स्वस्थ होने की खबर सुनने के इंतजार में था। उनके चाहने वालों की आंखें नम थीं और दिल में बस एक ही दुआ थी कि उनकी पसंदीदा गायिका ठीक होकर वापस लौट आएं, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
सोमवार को होगा अंतिम संस्कार
परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आशा भोसले का अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा। उनका पार्थिव शरीर सुबह 11 बजे मुंबई के लोअर परेल स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। यही वह स्थान है, जहां उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर का भी अंतिम संस्कार किया गया था।
बचपन से ही संगीत से जुड़ा था जीवन
आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को एक संगीत परिवार में हुआ था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और अभिनेता थे। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया, जिसके बाद परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस मुश्किल दौर में उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और आशा भोसले भी संगीत की दुनिया में कदम रख दिया।
मराठी फिल्म से शुरू हुआ संगीत सफर
आशा भोसले ने अपने करियर की शुरुआत बेहद कम उम्र में की थी। उन्होंने पहला गाना मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ (1943) में गाया था। इसके बाद बॉलीवुड में उन्होंने फिल्म ‘चुनरिया’ (1948) के गीत ‘सावन आया’ से एंट्री की। उनकी आवाज में एक अलग ही जादू था, जिसने उन्हें धीरे-धीरे संगीत की दुनिया में पहचान दिलाई और वह लाखों दिलों की धड़कन बन गईं।
सात दशकों तक चला सुनहरा सफर
करीब 70 साल लंबे अपने करियर में आशा भोसले ने हजारों गाने गाए और हर शैली में खुद को साबित किया। ग़ज़ल, पॉप, क्लासिकल, फिल्मी गीत—हर अंदाज में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज में वह versatility थी, जिसने उन्हें भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में लोकप्रिय बनाया।
हमेशा याद रहेंगी सुरों की मलिका
आशा भोसले भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज हमेशा जिंदा रहेगी। उनके गाए गीत आने वाली पीढ़ियों को भी उतना ही प्रभावित करते रहेंगे। संगीत जगत ने आज एक अमूल्य रत्न खो दिया है, लेकिन उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी।
