सपा प्रमुख बोले -बैलेट पेपर की वापसी ही लोकतंत्र की वापसी, EVM हटाओ,भरोसा वापस लाओ!पूर्व सीएम ने कहा-चुनाव आयोग निष्पक्ष क्यों नहीं?, इलेक्ट्रोरल बॉन्ड और सोशल मीडिया कैम्पेन पर SP हमला-‘सबसे ज़्यादा फायदा भाजपा को’
नई दिल्ली/लखनऊ : संसद में चुनाव सुधार पर हुई बहुचर्चित बहस के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रणाली में सुधार तभी संभव है जब चुनाव आयोग निष्पक्ष हो और उसकी नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया से की जाए।
“EVM पर दुनिया सवाल उठा रही… भारत क्यों अड़ा है?”- अखिलेश यादव
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने संसद में कहा कि ईवीएम से चुनाव पर सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने जर्मनी का उदाहरण देते हुए कहा कि “जर्मनी में ईवीएम असंवैधानिक मानी गई है, वहाँ बैलेट पेपर से वोट पड़ता है। जब तकनीक में हम उनसे कई गुना पीछे हैं, तो हम वोटिंग मशीनों पर क्यों टिके हैं?”उन्होंने स्पष्ट कहा कि “हमारी मांग है कि चुनाव बैलेट पेपर से हों। यह भरोसे का सवाल है।”
“यह SIR नहीं… धीरे-धीरे NRC लागू किया जा रहा है”
उत्तर प्रदेश में चल रहे SIR (Special Intensive Revision) को लेकर अखिलेश यादव बेहद आक्रामक रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि “आधार कार्ड में फोटो, फिंगरप्रिंट, रेटिना-सब कुछ है, फिर भी उसे नहीं माना जा रहा। मतलब साफ है-यह SIR नहीं, अंदर ही अंदर NRC का काम हो रहा है।” उन्होंने दावा किया कि यूपी में 5 करोड़ से ज्यादा लोगों को दोबारा फॉर्म भरना पड़ सकता है। 3 करोड़ से अधिक मजदूर यूपी के बाहर रहते हैं,और उन्हें एनआरसी जैसे प्रभाव का नुकसान होगा।
“SIR के दबाव में अब तक 9 बीएलओ की मौत-SP ने दो लाख की मदद दी”
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि SIR के दौरान बीएलओ पर अनियंत्रित दबाव डाला जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब तक यूपी में 9 बीएलओ की मौत हो चुकी है। उन्हें कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई। पूरा परिवार फॉर्म भरवाने में लगा है। उनकी मांग कि प्रत्येक मृतक बीएलओ परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए।
“चुनाव आयोग पक्षपाती- फर्रुखाबाद से लेकर रामपुर तक परिणाम बदले गए”
एसपी चीफ अखिलेश यादव ने सीधे आरोप लगाया कि “भारत में चुनावी प्रक्रिया को बाहर वालों ने नहीं, अंदर वालों ने खराब किया है।”उपचुनाव और लोकसभा चुनाव 2024 का जिक्र करते हुए उन्होंने उदाहरण दिए। फर्रुखाबाद में मतगणना के दिन लाठियां चलाई गईं, लाइट काटी गई।रामपुर उपचुनाव में मतदाताओं को घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया।मिल्कीपुर में भी फर्जी वोट, बीएलओ तैनाती में भेदभाव हुआ। उन्होंने कहा “वोट चोरी नहीं, वोट डकैती हुई है।”
इलेक्ट्रोरल बॉन्ड पर हमला: “सबसे ज्यादा पैसा भाजपा के पास… और वही चुनाव बिगाड़ रहा है”
उन्होंने ने आरोप लगाया कि इलेक्ट्रोरल बॉन्ड का सबसे बड़ा लाभ भाजपा को मिलता है। चुनावों में सबसे अधिक धन भाजपा खर्च करती है। सोशल मीडिया पर विपक्ष की छवि खराब करने पर हजारों करोड़ खर्च किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इन बिंदुओं पर सुधार नहीं होगा, ‘फ्री एंड फेयर इलेक्शन’ असंभव है।
“लोकतंत्र में भरोसा चाहिए- न कि बुलडोजर की राजनीति”
गोवा हादसे पर अखिलेश यादव ने कहा कि “गोवा में जो घटना हुई वो बेहद दुखद है। इसकी जिम्मेदारी सरकार की है।”“सामान्य घटना पर बुलडोजर दौड़ जाता था, अब कफ सिरप का इतना बड़ा मामला हुआ।बुलडोजर की चाभी ही नहीं मिल रही।”
“हम 5 से 37 सांसद बने- 2024 में भाजपा को यूपी में दूसरे नंबर पर भेज दिया”
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव जीत-हार का खेल है, लेकिन “हमने 2024 में भाजपा को यूपी में दूसरे नंबर पर कर दिया। अयोध्या से भी BJP हार गई, यह जनता का संदेश है।”
SIR में धांधली के आरोप, कई जिलों में लाखों वोटर लिस्ट से नाम काटे
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर SIR प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की है। पार्टी ने वाराणसी, आज़मगढ़, बस्ती, अमरोहा, कानपुर देहात और बाराबंकी में बड़े पैमाने पर मतदाता सूची गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, सपा प्रत्याशी MLC आशुतोष सिन्हा और उनके परिवार द्वारा जमा किए गए वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म को अलग-अलग बूथों में दर्ज कर दिया गया, जिससे भ्रम की स्थिति।बड़ा गाँव ब्लॉक के ग्रामीणों को पिंडरा ब्लॉक में जोड़ दिया गया। आज़मगढ़ में 6 लाख नाम हटाने की साजिश की। सभी विधानसभा क्षेत्रों में बीएलओ पर दबाव बनाकर अनुपस्थित,शिफ्टेड,डुप्लीकेट,लापता की श्रेणी डालकर 6 लाख+ मतदाताओं के नाम डिलीट किए जाने का आरोप। बीएलओ को टार्गेट पूरा करने के लिए मतदाताओं को बिना जांच सी कैटेगरी में डालने का आरोप है। बस्ती के मतदेय स्थलों पर बीएलओ द्वारा राजनीतिक दलों को दी जाने वाली सूची अधूरी हैं।
