मथुरा : वृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के तोशाखाना यानी खजाने को आज दूसरे दिन फिर से खोला गया। इस बार जो दृश्य सामने आया, उसने मंदिर प्रशासन और भक्तों दोनों को हैरान कर दिया। खजाने के मुख्य दरवाजे को ग्राइंडर से काटने के बाद मंदिर कमेटी और प्रशासनिक टीम अंदर दाखिल हुई। जैसे ही टीम अंदर गई, वहां सीढ़ियों के माध्यम से नीचे जाने वाला एक पुराना तहखाना भी दिखाई दिया। अंदर एक कमरे में लकड़ी के दो संदूक मिले, जिनमें एक बड़ा और एक छोटा संदूक था। इन संदूकों को सावधानीपूर्वक खोला गया, तो उनके अंदर कई धातु के बर्तन, कुछ पुराने सिक्के और कीमती नग मिले। इसके अलावा कमरे के भीतर एक लंबा लकड़ी का बक्सा भी पाया गया। इस बक्से को खोला गया, तो उसमें सोने की एक चमचमाती छड़ी और गुलाल लगी हुई चांदी की तीन छड़ें रखी हुई मिलीं।
टीम के सदस्य जब तहखाने की ओर बढ़े, तो सभी ने बारी-बारी से नीचे उतरकर जांच की। नीचे का हिस्सा पूरी तरह से साफ मिला, वहां कोई सामग्री नहीं थी। हालांकि, ऊपर के कमरे में मिले संदूक और बक्से ने सभी का ध्यान खींच लिया। इन छड़ियों और वस्तुओं को देखकर ऐसा लगा मानो ठाकुर जी स्वयं इनका उपयोग करते रहे हों। मंदिर के सेवायत दिनेश गोस्वामी ने बताया कि तहखाने तक की जांच पूरी हो चुकी है और जो छड़ियां मिली हैं, उन्हें देखकर यही प्रतीत होता है कि ठाकुर जी ने होली के दौरान चांदी की छड़ियों से रंग खेला होगा और धुरेड़ी के दिन सोने की छड़ी धारण की होगी।
मंदिर के इस खजाने को वर्षों बाद खोला गया है, जिससे भक्तों में उत्सुकता और बढ़ गई है। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि यह तोशाखाना केवल एक संग्रहालय नहीं, बल्कि ठाकुर जी की लीलाओं से जुड़ा आध्यात्मिक प्रतीक है। वहीं, खजाने में छिपे तथ्यों को लेकर प्रशासनिक जांच भी जारी है। अधिकारी हर वस्तु का दस्तावेजीकरण कर रहे हैं और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ प्रमाण सुरक्षित किए जा रहे हैं।
वृंदावन में यह चर्चा आम हो गई है कि मंदिर के इस खजाने में अभी भी और रहस्य छिपे हो सकते हैं, जिन्हें आने वाले दिनों में उजागर किया जाएगा। ठाकुर जी की सोने और चांदी की छड़ियों को देखकर भक्तों की आंखें श्रद्धा से भर आईं। मंदिर परिसर में माहौल भक्तिमय हो गया और लोगों ने इसे ठाकुर जी की दिव्य लीला बताया। इस खुलासे के बाद बांके बिहारी मंदिर एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में आ गया है।
