स्कूल जैसा नज़ारा, बागपत में दरोगाओं की लिखित परीक्षा कराई, विवेचना सुधार के लिए एग्जाम
बागपत/लखनऊ : यूपी के बागपत जिले में रविवार को पुलिस महकमे में एक अनोखा और सकारात्मक प्रयोग देखने को मिला। यहां की पुलिस लाइन स्थित नटराज हॉल, और बड़ौत में एसपी बागपत सूरज कुमार राय की पहल पर जिले के सभी निरीक्षक (इंस्पेक्टर)। और दरोगाओं (सब इंस्पेक्टर) की लिखित परीक्षा कराई गई। परीक्षा के दौरान एसपी सूरज कुमार राय खुद इनविजिलेटर बने और पुलिस अधिकारी छात्र की तरह बेंच पर बैठकर परीक्षा देते नजर आए। यह दृश्य देखकर माहौल किसी स्कूल या कॉलेज के एग्जाम हॉल जैसा लग रहा था।
नए कानूनों की परीक्षा
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इस परीक्षा में कानून व्यवस्था, विवेचना, साइबर क्राइम, बीएनएस, आईपीसी और सीआरपीसी से जुड़े प्रश्न पूछे गए था। एग्जाम 75 अंक का था। इसमें हर प्रश्न का सही उत्तर देने पर एक अंक था। मगर, गलत उत्तर देने पर नेगेटिव मार्किंग के रूप में आधा अंक काटा जाएगा। एसपी के पीआरओ केवल सिंह ने “The Justice HINDI” को बताया कि नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS)- 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)- 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम इंडियन एविडेंस एक्ट)- 2023 से जुड़े प्रश्न थे। इसमें जिले भर के इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर शामिल हुए थे। पुलिस लाइंस में आयोजित एग्जाम के प्रभारी कप्तान साहब और बड़ौत एग्जाम सेंटर्स के एडिशनल एसपी प्रभारी प्रवीण चौहान थे। सभी अधिकारियों को निर्धारित समय में उत्तर पुस्तिका भरनी पड़ी थीं। इस पहल का उद्देश्य केवल जानकारी की जांच करना नहीं, बल्कि पुलिसिंग से जुड़ी चुनौतियों को समझना और विवेचना में सुधार लाना भी था।
जिले में 13 थाने, और 43 चौकी
बागपत जिले में 13 थाने, और 43 चौकी हैं। एग्जाम पास करने वाले इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर को ही चार्ज दिया जाएगा। एसपी सूरज कुमार राय ने मीडिया को बताया कि विवेचना में कमियों के कारण कई मामलों की जांच प्रभावित होती है। इस परीक्षा से यह आकलन किया जाएगा कि कौन अधिकारी किस क्षेत्र में बेहतर योगदान दे सकता है। इसके साथ ही सही कानूनी जानकारी और कार्यप्रणाली में सुधार लाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं, बल्कि सटीक विवेचना और कानून की जानकारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
पुलिस की कार्यशैली में आएगा सुधार
इस पहल को पुलिस महकमे में एक नई शुरुआत माना जा रहा है। आमतौर पर परीक्षा का चलन केवल छात्रों तक सीमित होता है, लेकिन जब खुद जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी परीक्षा देते नजर आए तो यह चर्चा का विषय बन गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयोग पुलिस की कार्यशैली में पारदर्शिता और मजबूती लाने में मदद
