107 वें उर्स-ए-रज़वी जामियातुर्रज़ा में तालीम, पर्दा और अमन पर उलेमा का ज़ोर
बरेली : दरगाह आला हज़रत/ताजुश्शरिया की सरज़मीन पर सुन्नी बरेलवी मसलक के पेशवा इमाम अहमद रज़ा ख़ान क़ादरी (आला हज़रत) रहमतुल्लाह अलैह का 107वां उर्स-ए-रज़वी मदरसा जामियातुर्रज़ा (मथुरापुर इस्लामिक स्टडी सेंटर) में हुज़ूर क़ाइदे मिल्लत मुफ़्ती मुहम्मद असजद रज़ा ख़ान क़ादरी की सरपरस्ती, और सदारत, उर्स प्रभारी सलमान मियां एवं फरमान मियां की निगरानी में बड़े अदब व एहतराम के साथ मनाया गया। इस मौके पर क़ाज़ी -ए- हिंदुस्तान मुफ़्ती मुहम्मद असजद रज़ा ख़ान क़ादरी ने अपने पैग़ाम में दुनिया भर के मुसलमानों को हिदायत दी कि बच्चों और बच्चियों में बचपन से ही नमाज़, रोज़ा, तिलावत -ए- कुरआन और दीनी किताबों का शौक पैदा करें।।औलाद को हलाल-हराम के मसाइल से वाक़िफ़ कराएं, ताकि वो सही-ग़लत का फ़र्क़ समझ सकें।
सोशल मीडिया के नुक़सान से बचाएं औलाद को

उलमा ने तालीम (लड़के-लड़कियों की एक साथ शिक्षा) से गुरेज़ (मना) किया जाए। इसके साथ ही शादी-ब्याह में फ़िज़ूलखर्ची से बचने। औरतों के पर्दे पर ख़ास तवज्जोह देने, क्योंकि, कुरआन और अहादीस में इसकी तालीम मौजूद है।
आला हज़रत ने पूरी ज़िंदगी गुस्ताख़-ए-रसूल का किया रद्द

मुफ़्ती अफ़ज़ल रज़वी साहब ने बयानात करते हुए कहा कि आला हज़रत रहमतुल्लाह अलैह ने सारी ज़िंदगी गुस्ताख़-ए-रसूल का रद्द किया और उम्मत के दिलों में इश्क़-ए-रसूल जगाने का काम किया है। इसी वजह से दुनिया भर में लोग उन्हें आशिक-ए-रसूल के नाम से जानते हैं। मौलाना शकील और बाहर से आए उलमा-ए-किराम ने भी आला हज़रत की इल्मी और रुहानी सेवाओं पर रोशनी डाली।
कुरान की तिलावत से आगाज

उर्स के प्रोग्राम की शुरुआत कारी शरफ़ुद्दीन रज़वी की तिलावत -ए-कुरआन से की। मौलाना गुलज़ार रज़वी ने प्रोग्राम की निज़ामत की। नातख़्वां हज़रात ने नात -ओ-मनक़बत पेश कर महफ़िल को रूहानी रंगत बख़्शी।
ज़ायरीन के लिए इंतज़ाम और अमन की दुआ
उर्स प्रभारी सलमान हसन ख़ान (सलमान मियां) और फरमान मियां ने बताया कि बाहर से आए ज़ायरीन के लिए लंगर और ठहरने का बड़े पैमाने पर इंतेज़ाम किया गया। मुल्क में अमनो-अमान के लिए ख़ास दुआ की गई। दीनी व दुनियावी तालीम पर ज़ोर दिया गया। उर्स का प्रोग्राम मरकज़ से ऑडियो लाइव प्रसारण किया गया। जिसे दुबई, UK, अमेरिका, हॉलैंड, मलावी, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका समेत दुनिया के कई मुल्कों में सुना गया।
देश, और दुनिया की प्रमुख हस्तियां शामिल
उर्स में देश और दुनिया भर से बड़ी हस्तियां शामिल हुई। उर्स की व्यवस्था की जिम्मेदारी डॉ. मेहंदी हसन, हाफिज़ इकराम, शमीम अहमद, मोईन ख़ान, नदीम सुब्हानी, कारी वसीम, कौसर अली, यासीन ख़ान, सैय्यद रिज़वान, अब्दुल सलाम, दन्नी अंसारी समेत बड़ी तादाद में अकीदतमंद मौजूद रहे।
