दुनिया भर से जायरीन पहुँचे बरेली, दरगाह आला हज़रत में 107वां उर्स शुरू,नारे तकबीर और मसलक -ए-आला हज़रत के नारों से गूंजा
बरेली : फाजिल-ए-बरेलवी इमाम अहमद रजा खां (आला हज़रत) का 107वां उर्से रज़वी का आगाज़ हो गया। सोमवार को रज़वी परचम कुशाई की रस्म दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा ख़ान (सुब्हानी मियां) के दस्ते मुबारक से अदा की गई। इस मौके पर सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां), सैय्यद आसिफ़ मियां और मुल्क एवं दुनिया भर से आए उलमा मौजूद रहे। परचम कुशाई के साथ ही दरगाह और इस्लामिया मैदान में “नारे तकबीर- अल्लाहु अकबर, मसलक-ए-आला हज़रत जिंदाबाद” की सदाओं से गूंज उठा। फातिहा और ख़ुसूसी दुआ के बाद आला हज़रत की लिखी नातें और मनक़बतें पूरे माहौल में सुनाई देती रहीं।
नातिया मुशायरा देर रात तक जारी
उर्स के पहले दिन रात 10:35 बजे हुज्जातुल इस्लाम मुफ़्ती हामिद रज़ा ख़ान (हामिद मियां) के कुल शरीफ़ की फ़ातिहा अदा की गई। इसके बाद नातिया मुशायरा का आगाज़ हुआ, जिसकी सदारत मुफ़्ती अहसन मियां ने की। मुशायरे का मिसरा-ए-तरही था “पीते हैं तेरे दर का, खाते हैं तेरे दर का” “हम तो खुद्दार हैं, खुद्दारी है शैवा अपना” देश-विदेश के उलमा व शायरों ने अपने कलाम पेश किए और महफ़िल देर रात तक जारी रही।
दुनियाभर से ज़ायरीन की आमद
उर्स में शामिल होने के लिए दुबई, साउथ अफ्रीका, मलावी, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, कतर, ओमान और मुल्क के कोने-कोने से जायरीन पहुँच चुके हैं। मॉरिशस से मुफ़्ती नदीम मंजरी, नेपाल से मौलाना फूल मोहम्मद नेमत, साउथ अफ्रीका से मौलाना सलीम खुशतरी, दुबई से हबीब उर रहमान समेत बड़ी तादाद में विदेशी मेहमान शरीक हुए।
19 को रेहान ए मिल्लत का कुल
मंगलवार सुबह फ़ज्र के बाद कुरानख्वानी, सुबह 9:58 बजे रेहाने मिल्लत का कुल शरीफ़, 10:30 बजे मुफस्सिर-ए-आज़म का कुल शरीफ़, और आपसी सौहार्द कॉन्फ्रेंस जिसमें उलमा नामूस-ए-रिसालत, मिशन -ए-मसलक आला हज़रत, समाज सुधार, हिन्दू-मुस्लिम एकता जैसे मुद्दों पर तक़रीर करेंगे, और रात 1:40 बजे मुफ्ती आज़म-ए-हिन्द का कुल शरीफ़ अदा होगा। दरगाह की तमाम इंतेज़ामात मौलाना सय्यद शबाहत अली, मौलाना ज़िक्रउल्लाह, राशिद अली खान, मौलाना अबरार उल हक़ समेत बड़ी टीम की निगरानी में चल रहे हैं।
