बरेली : उर्स-ए-रज़वी के मौके पर दरगाह आला हज़रत से दुनिया भर से आए जायरीन के लिए दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) ने अहम पैग़ाम दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास खुद उन शख्सियतों को याद रखता है। जिनकी पहचान इंसानियत और इल्म से होती है। इमाम अहमद रज़ा फाज़िले बरेलवी ने अपने इल्मी और दीनी कमाल से मुसलमानों के दिलों में ज़हनी इंकलाब पैदा किया।
दरगाह से जारी पैग़ाम
आला हजरत दरगाह से जारी पैग़ाम में “अल्लाह की रस्सी को मजबूती से थामें और दीन-ए-इस्लाम पर सख्ती से कायम रहें।””मसलक-ए-अहले सुन्नत और मुल्क की तरक्की के लिए काम करना हर मुरीद की जिम्मेदारी है।””इस्लाम और आला हज़रत का पैग़ाम मुहब्बत है, उसे आम करें।””सामाजिक बुराइयों से बचें और सोशल मीडिया का इस्तेमाल सावधानी से करें।”
बुजुर्गों ने दिया इत्तेहाद का पैगाम
सज्जादानशीन ने खानकाही इत्तेहाद (Unity) पर ज़ोर देते हुए कहा कि सभी सिलसिलों के बुजुर्गों ने हमेशा मोहब्बत, भाईचारे और अमन का संदेश दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अपने वतन और मज़हब के सच्चे वफादार बनकर लोगों के लिए भलाई का काम करना ही आला हज़रत को सच्चा ख़िराज होगा।
