आगरा/लखनऊ : यूपी पुलिस की साख को झटका देने वाली एक शर्मनाक घटना में आगरा पुलिस कमिश्नरेट के बालूगंज चौकी इंचार्ज सहित 4 दरोगा और 4 आरक्षी को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि लूट के तीन आरोपियों को फर्जी मुठभेड़ से बचाने के लिए इन पुलिसकर्मियों ने ‘सेटिंग’ की। वादा किया गया कि किसी के “पैर में गोली नहीं लगेगी”, और गिरफ्तारी बिना किसी मुठभेड़ के “दिखा दी जाएगी”।
जानें क्या है पूरा मामला?
23 जुलाई को रकाबगंज थाना क्षेत्र में मोबाइल लूट की वारदात हुई थी। जंगजीत नगर निवासी राकेश मथुरिया से तीन बदमाशों ने मोबाइल लूट लिया था। अगले ही दिन पुलिस ने दावा किया कि तीन में से दो लुटेरे सादाब उर्फ फैज़ और केशव पकड़े गए हैं, जबकि साहिल फरार है, लेकिन जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपियों को मुठभेड़ से बचाने के लिए चौकी पर बुलाया गया, गिरफ्तारी “डाल दी गई”, और पूरे घटनाक्रम की जानकारी एक “मध्यस्थ” के ज़रिये तय की गई।
कौन-कौन हुए सस्पेंड?
चौकी प्रभारी अमित कुमार राणा, सब इंस्पेक्टर (SI) राहुल गिरी, अंकित, विनय धारा, मुख्य आरक्षी धर्मेंद्र कुमार, आलोक कुमार, कांस्टेबल: विकास यादव, मोहम्मद आमिर आलम, ADCP आदित्य कुमार ने वायरलेस मैसेज भेजकर सभी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। पुलिस अफसरों ने मीडिया को बताया कि “लुटेरे अगर खुद पुलिस के पास आए तो ज़ाहिर है, डराने-धमकाने या समझौते के बिना ऐसा नहीं हो सकता। जब जांच हुई तो पूरी सच्चाई सामने आ गई।”
