संजीव मेहरोत्रा
महामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन
जून 2025 में बैंक ऋण वृद्धि दर घटकर 10.2% हो गई, जबकि पिछले साल जून 2024 में यह 13.8% थी। आरबीआई के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि कृषि, उद्योग, सेवा और व्यक्तिगत क्षेत्रों में ऋण मांग में व्यापक गिरावट आई है। RBI Data के मुताबिक कृषि ऋण घटकर 6.8% रह गया (जून 2024 में 17.4%),उद्योग क्षेत्र: घटकर 5.5% (पिछले साल 7.7%), सेवा क्षेत्र: गिरकर 9.6% (2024 में 15.1%), व्यक्तिगत ऋण: 14.7% (पिछले वर्ष 16.6%) है। हालांकि, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) में ऋण वृद्धि बरकरार है, विशेषकर “इंजीनियरिंग”, “निर्माण” और “वस्त्र उद्योग” में।
यह गिरावट क्यों मायने रखती है?
कम ऋण का मतलब है, कम निवेश, कम खर्च, और धीमी GDP वृद्धि। कृषि और MSME सेक्टर के लिए फंडिंग चुनौतीपूर्ण हो सकती है। उपभोक्ताओं के लिए कार, घर, शिक्षा जैसे व्यक्तिगत लोन भी महंगे या कम सुलभ हो सकते हैं। इसका बैंकिंग क्षेत्र पर भी असर होगा। ऋण वृद्धि धीमी होने से बैंकों की आय और लाभप्रदता प्रभावित होगी, जोखिम प्रबंधन और क्रेडिट योग्यता का दोबारा मूल्यांकन ज़रूरी होगा। यदि अर्थव्यवस्था में विश्वास बहाल होता है, और ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, तो ऋण वृद्धि दोबारा रफ्तार पकड़ सकती है। लेकिन फिलहाल के आंकड़े आर्थिक सुस्ती की गंभीर चेतावनी हैं।
