मुजफ्फरनगर/ लखनऊ : वर्ष 2013 के चर्चित मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में अदालत ने 10 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के काकड़ा गांव में वैमनस्य फैलाने के आरोप में दर्ज इस केस की सुनवाई विशेष गैंगस्टर कोर्ट (अपर सत्र न्यायालय-5) में न्यायाधीश काशिफ शेख ने की। प्रकरण में अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका। अधिकांश गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। कोर्ट ने माना कि मुकदमे में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसलिए सभी आरोपियों को बरी किया जाता है।
जानें क्या है मामला?
7 सितंबर, 2013 को नंगला मंदौड़ पंचायत से लौटते वक्त पुरबालियान गांव में काकड़ा के किसानों की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया था। वादी इकबाल और नूर मोहम्मद ने 9 सितंबर को गांव के ही कुछ लोगों के खिलाफ धारा 153A (वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाने) के तहत केस दर्ज कराया था। 2018 में पुलिस ने कौटिल्य उर्फ कोकिल, बबलू, टिंकू, विपिन, कल्लू, पूरण, अनिल, कोमल, राजा और धन्ना के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। लेकिन सुनवाई के दौरान गवाह पक्षद्रोही हो गए।
यह दिए गवाहों के बयान
कुछ गवाहों ने कोर्ट में कहा कि वे घटना के दिन दिल्ली में कपड़ा बेचने गए थे, और उनका नाम पुलिस ने खुद जोड़ दिया। वहीं वादी ने कहा कि कुछ लोगों ने उनसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए थे। जिन्हें तहरीर के रूप में इस्तेमाल कर लिया गया।
कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष गवाहों की विश्वसनीयता साबित नहीं कर पाया, और कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं था। जिससे आरोपियों की संलिप्तता सिद्ध की जा सके। अतः सभी को दोषमुक्त किया गया।
