भारत के राष्ट्रपति और 25 जुलाई का अटूट रिश्ता
बरेली : भारत के राजनीतिक इतिहास में 25 जुलाई एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक तारीख बन गई है। साल 1977 में नीलम संजीव रेड्डी के शपथ लेने के बाद से लेकर 2022 में द्रौपदी मुर्मू तक, लगातार 10 राष्ट्रपतियों ने इसी दिन राष्ट्रपति पद की शपथ ली है। हालांकि, भारतीय संविधान में ऐसा कोई नियम नहीं है कि शपथ 25 जुलाई को ही ली जाए, लेकिन पिछले 48 वर्षों से ये एक परंपरा का रूप ले चुकी है। ये सिलसिला सिर्फ नियमित चुनावों में बने राष्ट्रपतियों पर लागू होता है, न कि मध्यावधि या आकस्मिक परिस्थितियों में चुने गए राष्ट्रपतियों पर।
25 जुलाई को शपथ लेने वाले 10 राष्ट्रपति
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देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 जुलाई, 2022 को शपथ ली है। इससे पहले रामनाथ कोविंद ने 25 जुलाई, 2017 को शपथ ली थी, प्रणब मुखर्जी ने 25 जुलाई, 2012,
प्रतिभा पाटिल ने 25 जुलाई, 2007, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने 25 जुलाई, 2002, के.आर. नारायणन ने 25 जुलाई,1997, शंकर दयाल शर्मा ने 25 जुलाई, 1992, आर. वेंकटरमन ने 25 जुलाई,1987, ज्ञानी जैल सिंह ने 25 जुलाई, 1982
नीलम संजीव रेड्डी ने 25 जुलाई 1977 को शपथ ली है।
चार राष्ट्रपतियों ने 25 जुलाई को नहीं ली शपथ
देश के चार राष्ट्रपतियों ने 25 जुलाई को शपथ नहीं ली थी। इसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी, 1950, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 13 मई, 1962, डॉ. जाकिर हुसैन ने 13 मई 1967 (कार्यकाल के दौरान निधन), और फखरुद्दीन अली अहमद ने 24 अगस्त 1974 (कार्यकाल में निधन) को शपथ ली थी। इनमें से जाकिर हुसैन और फखरुद्दीन अली अहमद का कार्यकाल बीच में ही समाप्त हो गया। जिससे मध्यावधि चुनाव हुए और उसके बाद से 25 जुलाई को एक स्थायी तिथि के रूप में अपनाया गया।
जानें क्यों 25 जुलाई बन गई स्थायी तारीख?
इसका कोई संवैधानिक आधार नहीं है, लेकिन माना जाता है कि यह तिथि राष्ट्रपति पद के पूर्ववर्ती का कार्यकाल पूरा होते ही नये राष्ट्रपति को सौंपने की सहज प्रक्रिया के लिए सबसे उपयुक्त पाई गई। चूंकि, नीलम संजीव रेड्डी का कार्यकाल 25 जुलाई से शुरू हुआ, और फिर हर बार 5-5 साल बाद यही दिन स्वाभाविक रूप से सामने आता रहा। 25 जुलाई अब सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की एक परंपरा बन चुकी है। राष्ट्रपति भवन की सत्ता हस्तांतरण की यह शांत परंपरा भारत की संवैधानिक स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सुंदर झलक है।
