बरेली छावनी ने बनाया बड़ा प्लान, Plastic Free अभियान से शुरू होगी मुहिम, CEO डॉ. तनु जैन ने लिया जायजा
बरेली : राष्ट्रीय जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन की दिशा में बरेली छावनी परिषद ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। नकटिया नदी को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और जीवंत बनाने के उद्देश्य से रविवार सुबह बरेली छावनी परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. तनु जैन ने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों के साथ नदी के विभिन्न हिस्सों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने नकटिया नदी की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। नदी में और उसके आसपास जमा प्लास्टिक व ठोस कचरे, जल प्रवाह, संभावित प्रदूषण स्रोतों तथा नदी किनारे उपलब्ध क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान नदी के दीर्घकालिक और वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जीवन को लेकर अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा भी हुई।
सिर्फ सफाई नहीं, नदी को दोबारा जीवंत बनाने का लक्ष्य
डॉ. तनु जैन ने कहा कि नदी पुनर्जीवन को केवल सफाई अभियान तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसका उद्देश्य जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के माध्यम से नकटिया नदी को लंबे समय के लिए स्वच्छ और स्वस्थ बनाना है। इसके लिए चरणबद्ध और वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
पहले चरण में नकटिया को बनाया जाएगा Plastic Free
कार्ययोजना के पहले चरण में “Plastic Free Nakatia” अभियान चलाने की तैयारी है। इसके तहत नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों से प्लास्टिक कचरा हटाने के साथ लोगों को जागरूक किया जाएगा।अभियान में स्कूलों, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संस्थानों को शामिल करने की योजना है, ताकि नदी संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा सके।
तीन बड़े सफाई अभियान चलेंगे
दूसरे चरण में नदी के चिन्हित हिस्सों में तीन बड़े स्वच्छता अभियान चलाए जाएंगे। इन अभियानों के दौरान प्लास्टिक और अन्य ठोस कचरे को हटाया जाएगा। खास बात यह होगी कि सफाई के दौरान निकलने वाले कचरे की मात्रा, स्थान और प्रकार का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे भविष्य में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान और निगरानी में मदद मिलेगी।
GIS मैपिंग से चिन्हित होंगे प्रदूषण के हॉटस्पॉट
तीसरे चरण में नकटिया नदी के चिन्हित क्षेत्र की GIS आधारित वैज्ञानिक मैपिंग कराई जाएगी। इसमें नदी के जल प्रवाह, नालों के प्रवेश बिंदु, कचरा हॉटस्पॉट, संभावित प्रदूषण स्रोत, जलभराव वाले क्षेत्रों और पुनर्जीवन के लिए उपयुक्त स्थानों को चिन्हित किया जाएगा।
पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच
चौथे चरण में नदी के अलग -अलग स्थानों से पानी के नमूने लिए जाएंगे। इन नमूनों की वैज्ञानिक जांच के माध्यम से नदी के पानी में प्रदूषण की वास्तविक स्थिति और उसके प्रमुख कारणों का आकलन किया जाएगा। जल गुणवत्ता की रिपोर्ट आगे की पुनर्जीवन योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण आधार बनेगी।
प्रदूषित हिस्सों में
Bio-remediation का पायलट प्रयोग
पांचवें चरण में वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर नदी के प्रदूषित और संवेदनशील हिस्सों में बायो-रिमेडिएशन का प्रयोग किया जाएगा। इसके साथ प्राकृतिक फिल्ट्रेशन, उपयुक्त देशज जलीय एवं तटीय वनस्पतियों तथा अन्य पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को पायलट आधार पर आजमाने की योजना है।
तैयार होगी Nakatia River Rejuvenation DPR
सफाई अभियान, GIS मैपिंग, जल गुणवत्ता परीक्षण और बायो-रिमेडिएशन के परिणामों के आधार पर नकटिया नदी पुनर्जीवन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। इसके बाद परियोजना को व्यापक स्तर पर वित्तीय और तकनीकी सहयोग के लिए जल शक्ति मंत्रालय/नमामि गंगे कार्यक्रम के समक्ष प्रस्तुत करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
‘Clean → Map → Test → Bio-remediate → Restore’ होगा आधार
नदी पुनर्जीवन की पूरी प्रक्रिया को “Clean → Map → Test → Bio-remediate → Restore” के सिद्धांत पर आगे बढ़ाने की योजना है। यानी पहले नदी की सफाई, फिर वैज्ञानिक मैपिंग, जल गुणवत्ता की जांच, आवश्यक स्थानों पर बायो -रिमेडिएशन और इसके बाद नदी के दीर्घकालिक पुनर्जीवन पर काम किया जाएगा। डॉ. तनु जैन ने कहा कि लक्ष्य केवल नकटिया नदी से कचरा हटाना नहीं है, बल्कि इसे स्वच्छ, स्वस्थ और जीवंत नदी के रूप में पुनर्स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि नदी प्राकृतिक विरासत है और उसका संरक्षण केवल सरकार या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है।
