पीलीभीत : प्रदेश के गन्ना मंत्री और पीलीभीत सदर विधायक संजय सिंह गंगवार के एक बयान को लेकर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सपा जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा ने मंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा के नेता विकास और जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए समाज को बांटने वाली राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री को अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनानी चाहिए, न कि जिले की गंगा-जमुनी तहजीब को नुकसान पहुंचाने वाले बयान देने चाहिए।
दरअसल, हाल ही में अमरिया क्षेत्र में आयोजित एक रात्रि चौपाल कार्यक्रम के दौरान गन्ना मंत्री संजय सिंह गंगवार ने समाजवादी पार्टी, उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मुस्लिम मतदाताओं को लेकर कई तीखी टिप्पणियां की थीं। उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बना लिया। अब समाजवादी पार्टी ने मंत्री के बयान को राजनीतिक और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
सपा जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा नेताओं को जनता के असली मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में जिले के विकास के लिए कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ है। किसानों, युवाओं और व्यापारियों से जुड़े मुद्दे आज भी जस के तस बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब जनता सवाल पूछती है तो भाजपा नेता विकास की बात करने के बजाय धार्मिक और जातीय मुद्दों को उछालने लगते हैं।

जगदेव सिंह जग्गा ने कहा कि समाजवादी पार्टी के बढ़ते जनाधार से भाजपा घबराई हुई है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में जनता बदलाव चाहती है और इसी वजह से भाजपा नेताओं की भाषा और बयान लगातार आक्रामक होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री को बताना चाहिए कि उनके विभाग ने किसानों के लिए क्या किया है। जिले की चीनी मिलों की स्थिति क्या है और गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का समाधान कब होगा।
सपा जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है, जबकि सरकार लगातार किसानों के हितैषी होने का दावा करती है। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं और किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में मंत्री को किसानों की समस्याओं का समाधान करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि राजनीतिक मंचों से विवादित बयान देने पर।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और जिले में विकास कार्यों की गति बेहद धीमी है। उनके अनुसार भाजपा सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है और अब चुनाव नजदीक आते ही भावनात्मक मुद्दों को हवा देकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
उधर, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब अमरिया में आयोजित रात्रि चौपाल में गन्ना मंत्री संजय सिंह गंगवार ने समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कई बयान दिए। उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव के लिए वर्ष 2027 ही नहीं बल्कि 2047 तक मुख्यमंत्री बनने का रास्ता बंद है। उन्होंने समर्थकों से कहा था कि लाल टोपी लगाने वाले नेताओं को प्रदेश की जनता अब स्वीकार नहीं करेगी। मंत्री ने अपने संबोधन में मुस्लिम मतदाताओं को लेकर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ लेने के बाद विपक्ष को वोट देने की राजनीति अब नहीं चलेगी। उनके इस बयान पर विपक्ष ने आपत्ति जताते हुए इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला बयान बताया है।
इसके अलावा मंत्री ने अपने भाषण में सूर्य चौहान हत्याकांड का भी जिक्र किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी ने इस मामले में दोहरे मानदंड अपनाए। साथ ही उन्होंने कहा था कि हिंदू समाज अब जागरूक हो चुका है और जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर मतदान कर रहा है। उन्होंने विभिन्न राज्यों के चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए भाजपा की चुनावी सफलता को इसका उदाहरण बताया था।
अपने भाषण में गन्ना मंत्री ने बहुजन समाज पार्टी के समर्थकों से भी अपील की थी कि वे चुनाव में हाथी का बटन दबाने के बजाय भाजपा का समर्थन करें। उन्होंने वर्ष 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस कांड का उल्लेख करते हुए दलित समाज से भाजपा के पक्ष में एकजुट होने की अपील की थी। गन्ना मंत्री के इन बयानों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी ने इसे समाज को बांटने वाली राजनीति करार दिया है, जबकि भाजपा नेता इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बता रहे हैं। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, वैसे-वैसे इस तरह की बयानबाजी और तेज हो सकती है। फिलहाल पीलीभीत में गन्ना मंत्री के बयान और उस पर समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। अब देखना होगा कि यह विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से कितना असर डालता है और दोनों दल इसे किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
रिपोर्ट : ऋतिक द्विवेदी
