बरेली : यूपी के बरेली ज़िले में फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों से धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। शहर की बारादरी पुलिस ने मिलिट्री इंटेलिजेंस और एसओजी टीम के साथ संयुक्त कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, लैपटॉप, प्रिंटर, फिंगर प्रिंट स्कैनर और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।
सूचना मिलते ही जन सेवा केंद्र पर पुलिस की छापेमारी
पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम डोहरा स्थित शिव मंदिर के सामने संचालित “आव्या जन सेवा केन्द्र” में अवैध रूप से फर्जी आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। इस सूचना के बाद बारादरी पुलिस, मिलिट्री इंटेलिजेंस और एसओजी टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। पूछताछ के दौरान केंद्र संचालक कोई वैध रजिस्ट्रेशन नहीं दिखा सके। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को मौके से गिरफ्तार कर लिया।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
पुलिस ने इस मामले में अमित कुमार, ललित कुमार और भारत सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार अमित कुमार मूल रूप से खाईखेड़ा थाना भुता का रहने वाला है, जबकि ललित कुमार चंदपुर बिचपुरी और भारत सिंह बारादरी क्षेत्र का निवासी है। तीनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और उपकरण बरामद
पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में सामान बरामद किया गया। इनमें 67 आधार कार्ड, 18 आधार एनरोलमेंट फॉर्म, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, दो लैपटॉप, दो प्रिंटर, फिंगर प्रिंट स्कैनर, पेन ड्राइव और रबर से बने अंगूठे के क्लोन शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किया जा रहा था।
एनीडेस्क और वेबसाइट के जरिए चल रहा था पूरा नेटवर्क
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी एनीडेस्क एप्लिकेशन के जरिए सिस्टम एक्सेस लेते थे और फिंगर प्रिंट स्कैनर की मदद से आधार अपडेट करने तथा फर्जी दस्तावेज तैयार करने का काम करते थे। आरोपियों ने बताया कि वे एक पेड वेबसाइट का इस्तेमाल कर किसी भी नाम, फोटो और नंबर के जरिए फर्जी दस्तावेज बना लेते थे। पुलिस ने मौके पर जांच के दौरान एक फर्जी आधार कार्ड बनाकर भी इसकी पुष्टि की।
उत्तराखंड कनेक्शन भी आया सामने, जांच जारी
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि बेरोजगारी के चलते वे उत्तराखंड के रहने वाले एक व्यक्ति के संपर्क में आए थे, जिसने उन्हें इस अवैध काम का तरीका बताया था। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया है।
