बागपत : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बागपत में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सनातन संस्कृति, भारत की आस्था और ऐतिहासिक विरासत को लेकर बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन की आस्था को तोड़ने का प्रयास करने वाले विदेशी आक्रांता इतिहास से मिट गए, लेकिन सनातन संस्कृति आज भी पहले से अधिक मजबूती के साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसने सदियों तक विदेशी आक्रमणों का सामना किया, लेकिन इसके बावजूद अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था को बचाए रखा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मंदिरों, मठों और तीर्थ स्थलों को नष्ट करने की कोशिश की, वे खुद इतिहास में कहीं खो गए, जबकि सनातन धर्म की पहचान आज भी पूरे गौरव के साथ कायम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को खत्म करने के लिए कई प्रयास किए। मंदिरों को तोड़ा गया, तीर्थ स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन इसके बावजूद सनातन परंपरा समाप्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आज वही तीर्थ स्थल दोबारा पुनर्प्रतिष्ठा प्राप्त कर रहे हैं और देश की आस्था के केंद्र बनकर उभर रहे हैं। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बागपत की ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने कौरवों से पांडवों के लिए जिन पांच गांवों की मांग की थी, उनमें बागपत भी शामिल था। यही कारण है कि यह भूमि भारतीय इतिहास और धर्म दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले जब वह इस क्षेत्र में आए थे, तब यह स्थान काफी छोटा था, लेकिन स्थानीय लोगों और संत समाज के प्रयासों से अब इसे एक भव्य तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया गया है। उन्होंने इस विकास कार्य के लिए क्षेत्र के संतों और स्थानीय नागरिकों का आभार व्यक्त किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बागपत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी देश की महत्वपूर्ण धरती रही है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह का जन्म भी इसी क्षेत्र में हुआ था। उनकी कर्मभूमि होने के कारण बागपत ने देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र ने देश को कई ऐसे महान व्यक्तित्व दिए हैं जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में भारत का नाम रोशन किया। उन्होंने कहा कि बागपत की धरती विरासत और विकास दोनों का प्रतीक बन चुकी है। यहां जहां एक ओर धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है, वहीं दूसरी ओर विकास कार्यों के जरिए आधुनिक पहचान भी बनाई जा रही है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, संत समाज और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान लोगों ने जय श्रीराम और भारत माता की जय के नारों के साथ उनका स्वागत किया।
मुख्यमंत्री के इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। खासतौर पर सनातन संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को लेकर दिए गए उनके बयान को समर्थक एक मजबूत सांस्कृतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं।
