नई दिल्ली : नशा मुक्त भारत आंदोलन ने पंजाब में हाल ही में हुई जहरीली शराब की घटना को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है। पंजाब में जहरीली शराब पीने से 21 लोगों की मौत के बाद आंदोलन से जुड़े राष्ट्रीय और प्रांतीय नेताओं ने कड़ी कार्रवाई की मांग की। आंदोलन की राष्ट्रीय संयोजक और जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने जहरीली शराब बनाने वालों को आजीवन कारावास की सजा देने के लिए राष्ट्रीय कानून बनाए जाने की अपील की है।
शराबबंदी पर केंद्र सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग
मेधा पाटकर ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 47 के तहत केंद्र और राज्य सरकारों का यह कर्तव्य है कि वे शराबबंदी लागू करें, लेकिन इसके बावजूद शराब का कारोबार सरकारी राजस्व का एक बड़ा स्रोत बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अवैध शराब माफिया और सरकार के बीच गठजोड़ का परिणाम है कि आज भी देश के कई हिस्सों में लोग जहरीली शराब का शिकार हो रहे हैं। पाटकर ने याद दिलाया कि पंजाब में 2020 में भी इसी तरह की घटना में 121 लोग मारे गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कानूनी बदलाव नहीं किया गया। उन्होंने पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “भगवंत मान खुद शराब छोड़कर मुख्यमंत्री बने, लेकिन आज भी पंजाब नशे के दलदल में फंसा हुआ है।” उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह पूरे देश में शराबबंदी लागू करे और जहरीली शराब के कारोबारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई को प्राथमिकता में लाए।
शराब और ड्रग्स से युवा पीढ़ी बर्बादी की ओर
कर्नाटक के विधायक और आंदोलन के संयोजक बी.आर. पाटिल ने कहा कि शराब और ड्रग्स से युवा पीढ़ी बर्बादी की ओर बढ़ रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा, “आप धर्म और संस्कृति की बात करते हैं, लेकिन नशाबंदी पर क्यों चुप रहते हैं?”। फैज़ल खान, खुदाई खिदमतगार के संयोजक और नशा मुक्त आंदोलन के तीसरे संयोजक ने पंजाब सरकार की आलोचना करते हुए कहा, “जन आंदोलन से बनी सरकार को जनता की पीड़ा समझनी चाहिए, लेकिन आज भी पंजाब में अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है।” पूर्व विधायक एवं संयोजक डॉ. सुनीलम, आंदोलन के चौथे संयोजक ने कहा कि अगर आजादी के बाद से जहरीली शराब से हुई मौतों के दोषियों को कड़ी सजा मिली होती, तो आज यह सिलसिला नहीं चलता। उन्होंने अवैध शराब निर्माण को रोकने के लिए विशेष कानून बनाने की मांग की और कहा कि यह अवैध धंधा अब सामाजिक हत्या का रूप ले चुका है।
आंदोलन को तेज करने की अपील
नशा मुक्त भारत आंदोलन ने सभी सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं और नागरिकों से अपील की है कि वे शराबबंदी और नशा मुक्ति अभियान को और अधिक संगठित एवं प्रभावशाली बनाएं। यह आंदोलन केवल एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आपदा बन चुका है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर तत्काल और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।
