बरेली के शाही थाना क्षेत्र के पंथरा गांव का मामला, बुजुर्ग की हत्या पर न्यायालय ने सुनाई सजा
बरेली : यूपी के बरेली देहात के शाही थाना क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां करीब 9 साल पुराने हत्या के मामले में सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार सिंह की अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए तीन सगे भाइयों को उम्रकैद और 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जानें क्या था पूरा मामला?
यह घटना 16 मई 2015 को बरेली देहात के थाना शाही क्षेत्र के पंथरा गांव में हुई थी। वादी बिहारी लाल अपने खेत में काम कर रहे थे, तभी गांव के ही भोले और उसके बेटे तिलकराम,ओमप्रकाश और वीरपाल खेत की मेड़ काटने लगे। विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया।
खेत से घर तक चला खूनी संघर्ष
आरोप है कि चारों ने मिलकर लाठी, डंडे, कसी और फावड़े से हमला कर दिया। जान बचाने के लिए बिहारी लाल अपने घर की ओर भागे,लेकिन आरोपी वहां भी पहुंच गए और दोबारा हमला किया। इसी दौरान बीच-बचाव करने आए उनके पिता रामदयाल पर तिलकराम ने फावड़े और कसी से सिर पर वार किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हमले में बिहारी लाल और उनके बेटे महेंद्र पाल और कोमिल भी गंभीर रूप से घायल हो गए
एफआईआर से चार्जशीट तक
घटना के बाद उसी दिन थाना शाही में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 323 (मारपीट), 504 (गाली-गलौच) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट,चश्मदीद गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल के साक्ष्य के आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
अदालत में क्या हुआ साबित?
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी रीतराम राजपूत ने मजबूत पैरवी की। वादी बिहारी लाल और उनके दोनों बेटों ने चश्मदीद गवाह के रूप में घटना की पुष्टि की। डॉक्टर की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि रामदयाल की मौत सिर पर गंभीर चोट लगने से हुई थी। अदालत ने माना कि विवाद खेत की मेड़ को लेकर हुआ। मारपीट के दौरान ही हत्या की गई। गवाहों के बयान आपस में मेल खाते हैं
यहां सुनाया कोर्ट ने फैसला
सुनवाई के दौरान आरोपी भोले की मौत हो चुकी थी, इसलिए उसके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया। वहीं बाकी तीन आरोपी तिलकराम, वीरपाल और ओमप्रकाश को दोषी करार देते हुए अदालत ने धारा 302/34 (हत्या), धारा 323/34 (मारपीट) में सजा सुनाई। इसमें तीनों को उम्रकैद, 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड, जमानत रद्द कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
मजबूत पैरवी से मिला इंसाफ
इस मामले में डीजीसी रीतराम राजपूत की मजबूत पैरवी ने अहम भूमिका निभाई। वे पहले भी कई मामलों में आरोपियों को उम्रकैद और कठोर सजा दिला चुके हैं।
