नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने इस वर्ष हाईस्कूल यानी कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। देशभर के 22 रीजन में घोषित इन नतीजों में इस बार कुल 93.70 प्रतिशत छात्र-छात्राएं सफल हुए हैं। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए छात्रों को पीछे छोड़ दिया है और अपनी बढ़त बरकरार रखी है।
अगर लड़कियों और लड़कों के प्रदर्शन की बात करें तो छात्राओं का पास प्रतिशत 94.99 फीसदी रहा, जबकि छात्रों का पास प्रतिशत 92.69 फीसदी दर्ज किया गया। यानी करीब 2.30 प्रतिशत के अंतर से लड़कियां आगे रही हैं। यह लगातार कई वर्षों से देखा जा रहा है कि बोर्ड परीक्षाओं में छात्राएं बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं, जो शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती जागरूकता और अवसरों का संकेत है।
रीजन वाइज प्रदर्शन पर नजर डालें तो इस साल त्रिवेंद्रम और विजयवाड़ा ने संयुक्त रूप से 99.79 प्रतिशत के साथ देश में पहला स्थान हासिल किया है। इसके बाद चेन्नई 99.58 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि बेंगलुरु 98.91 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर रहा। वहीं दिल्ली वेस्ट रीजन 97.45 फीसदी के साथ टॉप पांच में शामिल रहा। दिल्ली-एनसीआर के प्रदर्शन की बात करें तो दिल्ली वेस्ट और दिल्ली ईस्ट दोनों ही रीजन ने शानदार प्रदर्शन किया है। दिल्ली वेस्ट का पास प्रतिशत 97.45 फीसदी और दिल्ली ईस्ट का 97.33 फीसदी रहा। वहीं गुरुग्राम का पास प्रतिशत 93.21 फीसदी और नोएडा का 87.66 फीसदी रहा, जो अपेक्षाकृत कम है।
उत्तर भारत के अन्य प्रमुख रीजन में लखनऊ का पास प्रतिशत 91.63 फीसदी, देहरादून का 91.59 फीसदी, प्रयागराज का 89.45 फीसदी और पंचकुला का 92.24 फीसदी रहा। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा नोएडा रीजन के गिरते प्रदर्शन को लेकर हो रही है। यहां पास प्रतिशत 87.66 फीसदी रहा, जो पिछले साल के 90.75 फीसदी से 3.09 प्रतिशत कम है। यह गिरावट शिक्षा विभाग और स्कूलों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
अगर स्कूलों के प्रदर्शन की बात करें तो केंद्रीय विद्यालय यानी केंद्रीय विद्यालय संगठन ने एक बार फिर 99.57 फीसदी के साथ टॉप किया है। इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय 99.42 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर रहे। सेंट्रल तिब्बतन स्कूलों का पास प्रतिशत 97.42 फीसदी रहा, जबकि निजी स्कूलों का 93.77 फीसदी दर्ज किया गया। वहीं सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 91.43 फीसदी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों का 91.01 फीसदी रहा।
कुल मिलाकर इस साल के परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि देश में शिक्षा का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है और छात्र-छात्राएं बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। खासतौर पर छात्राओं का प्रदर्शन यह दिखाता है कि वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और भविष्य में भी नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार हैं।
