दिल्ली : राज्यसभा में आम आदमी पार्टी द्वारा उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब खुलकर सामने आ चुका है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर तीखे बयान दे रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ पार्टी के अंदरूनी हालात को उजागर किया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है।
रविवार को राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह संसद में पंजाब से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के जरिए उन्होंने अपनी पार्टी के उन नेताओं को जवाब देने की कोशिश की है, जिन्होंने उन पर संसद में सक्रिय न रहने का आरोप लगाया था। वीडियो साझा करते हुए राघव चड्ढा ने लिखा कि, “आम आदमी पार्टी के मेरे उन साथियों के लिए, जिन्हें यह कहते हुए वीडियो जारी करने पर मजबूर होना पड़ा कि मैं संसद में पंजाब के मुद्दों को उठाने में विफल रहा, यह एक छोटा सा ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।”
उन्होंने आगे कहा कि पंजाब उनके लिए केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उनकी पहचान, जिम्मेदारी और भावनाओं से जुड़ा हुआ है। “पंजाब मेरे लिए सिर्फ चर्चा का विषय नहीं है। यह मेरा घर है, मेरा कर्तव्य है, मेरी मिट्टी है, मेरी आत्मा है,” इस भावनात्मक बयान के जरिए उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता को जाहिर किया। इससे पहले शनिवार को भी राघव चड्ढा ने पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने आरोपों को झूठा और एक सुनियोजित अभियान का हिस्सा बताया। उनका कहना था कि वह हमेशा संसद में आम जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं और बेवजह हंगामा या विवाद का हिस्सा बनने में विश्वास नहीं रखते।
एक वीडियो संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी विपक्ष के वॉकआउट में हिस्सा लेने से इनकार नहीं किया। उन्होंने अपने आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा कि अगर कोई एक भी ऐसा उदाहरण पेश कर दे, जहां उन्होंने विपक्ष के साथ खड़े होने से इनकार किया हो, तो वह जवाब देने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संसद की पूरी कार्यवाही रिकॉर्ड होती है, ऐसे में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यों से परे हैं। “मैं संसद में आम आदमी के मुद्दे उठाने जाता हूं, हंगामा करने और माइक तोड़ने नहीं,” इस बयान के जरिए उन्होंने अपनी कार्यशैली को स्पष्ट किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं करने के आरोप पर भी उन्होंने सफाई दी। चड्ढा ने कहा कि पार्टी के किसी भी नेता ने उनसे इस संबंध में न तो औपचारिक और न ही अनौपचारिक रूप से संपर्क किया। उन्होंने यह भी बताया कि उनका पूरा ध्यान जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रहा है। इनमें जीएसटी, आयकर, दिल्ली का प्रदूषण, पंजाब का जल संकट, शिक्षा, स्वास्थ्य, रेलवे यात्रियों की समस्याएं, मासिक धर्म स्वास्थ्य, बेरोजगारी और महंगाई जैसे अहम विषय शामिल हैं।
राघव चड्ढा के इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। जहां एक ओर पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है, खासकर तब जब कई राज्यों में चुनावी माहौल बनने लगा है। पार्टी के अंदर एकजुटता बनाए रखना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता मानी जा रही है।
