नई दिल्ली : देश के बैंकिंग क्षेत्र से इस समय एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है… जहां देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank में हुए एक फैसले ने निवेशकों और बाजार को हिला कर रख दिया है। बैंक के अंशकालिक अध्यक्ष Atanu Chakraborty ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे की सबसे बड़ी वजह उन्होंने अपने निजी मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों को बताया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि इतने बड़े बैंक के अध्यक्ष को बीच कार्यकाल में ही पद छोड़ना पड़ा?
जानकारी के मुताबिक, अतनु चक्रवर्ती का कार्यकाल वर्ष 2027 तक था, लेकिन उन्होंने समय से पहले ही पद छोड़ने का फैसला ले लिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने बैंक के अंदर कुछ ऐसी कार्यप्रणालियां देखीं, जो उनके निजी विचारों और नैतिकता से मेल नहीं खातीं। हालांकि उन्होंने विस्तार से यह नहीं बताया कि वे कौन सी बातें थीं, लेकिन उनके इस बयान ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस खबर का सीधा असर बाजार पर देखने को मिला। जैसे ही इस्तीफे की जानकारी सामने आई, निवेशकों में घबराहट फैल गई और HDFC Bank के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सुबह के कारोबार में बैंक का शेयर पांच प्रतिशत से ज्यादा गिर गया और इसकी कीमत करीब 800 रुपये के आसपास पहुंच गई।
जब किसी बड़े संस्थान का शीर्ष अधिकारी नैतिक कारणों का हवाला देकर पद छोड़ता है, तो निवेशकों के मन में उस संस्थान की कार्यप्रणाली को लेकर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। यही वजह है कि बाजार में इस तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली।
अब इस पूरे घटनाक्रम के बीच अगला कदम भी तेजी से उठाया गया है। Reserve Bank of India ने अनुभवी बैंकर Keki Mistry को तीन महीने के लिए अंतरिम अंशकालिक अध्यक्ष नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। वे 19 मार्च से यह जिम्मेदारी संभालेंगे। बैंकिंग क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि वे इस चुनौतीपूर्ण समय में बैंक को स्थिरता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
लेकिन इसके बावजूद कई सवाल अभी भी बाकी है क्या बैंक के अंदर वाकई कोई गंभीर समस्या है? क्या आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं? और सबसे अहम, क्या निवेशकों का भरोसा फिर से कायम हो पाएगा? फिलहाल, पूरे बाजार की नजरें इसी पर टिकी हैं कि बैंक इस स्थिति से कैसे बाहर निकलता है।
