नई दिल्ली : वडीनार पोर्ट पर मंगलवार सुबह एक बड़ा एलपीजी कार्गो लेकर जहाज एमटी नंदा देवी पहुंचा, जिसने देश की ऊर्जा आपूर्ति को मजबूती देने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है। दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह के अनुसार, जहाज सुबह करीब 2:30 बजे पोर्ट के एंकरिज क्षेत्र में पहुंचा। इस जहाज में करीब 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी गैस लदी हुई है, जो घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अधिकारियों ने इसे मौजूदा समय में एक बड़ी उपलब्धि बताया है, खासकर तब जब वैश्विक परिस्थितियों के चलते ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।
STS प्रक्रिया से होगा गैस ट्रांसफर
अधिकारियों के मुताबिक, इस एलपीजी कार्गो को सीधे पोर्ट पर नहीं उतारा जाएगा, बल्कि गहरे समुद्र में शिप-टू-शिप (STS) प्रक्रिया के जरिए दूसरे जहाज एमटी BW Birch में ट्रांसफर किया जाएगा। यह प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है और इसमें उच्च स्तर की तकनीकी सावधानी बरती जाती है। STS प्रक्रिया के तहत दो जहाज समुद्र में एक निश्चित दूरी पर खड़े होकर पाइपलाइनों के जरिए गैस का सुरक्षित ट्रांसफर करते हैं। चेयरमैन सुशील कुमार सिंह ने जहाज के कैप्टन और क्रू मेंबर्स से मुलाकात कर उनके सुरक्षित संचालन के लिए धन्यवाद दिया और भरोसा दिलाया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान हर जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा में भारत की मजबूत पहल
एमटी नंदा देवी हाल के दिनों में दूसरा भारतीय एलपीजी जहाज है, जिसने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे संवेदनशील मार्ग को पार कर सुरक्षित भारत तक पहुंच बनाई है। इससे पहले एलपीजी कैरियर शिवालिक करीब 40,000 मीट्रिक टन गैस लेकर मुंद्रा पोर्ट पहुंचा था। अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों जहाजों के जरिए देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
मौजूदा वैश्विक हालात और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार और संबंधित एजेंसियां ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की बाधा से बचा जा सके और आपूर्ति श्रृंखला सुचारू बनी रहे।
जहाज से रसोई तक LPG पहुंचने का पूरा सफर
एलपीजी गैस का सफर जहाज से हमारे किचन तक पहुंचने तक कई चरणों से होकर गुजरता है। सबसे पहले, बड़े समुद्री जहाजों के जरिए गैस विदेशों से भारत के बंदरगाहों तक लाई जाती है। इसके बाद बंदरगाह पर बने एलपीजी टर्मिनल्स में बड़े पाइपों के जरिए गैस को उतारा जाता है और विशाल टैंकों में सुरक्षित रखा जाता है। यहां से गैस को देशभर के बॉटलिंग प्लांट्स तक भेजा जाता है। इसके लिए दो मुख्य तरीके अपनाए जाते हैं पहला, भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए, जिससे गैस लंबी दूरी तक तेज़ी से पहुंचाई जाती है; और दूसरा, रोड टैंकरों के जरिए, जो गैस को ट्रकों में भरकर प्लांट्स तक ले जाते हैं।
बॉटलिंग प्लांट में पहुंचने के बाद सिलेंडरों की बारीकी से जांच की जाती है, ताकि किसी भी तरह की लीकेज या खराबी से बचा जा सके। इसके बाद ऑटोमैटिक मशीनों के जरिए तय वजन के अनुसार सिलेंडरों में गैस भरी जाती है और उन्हें सील कर दिया जाता है। अंत में ये सिलेंडर डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा, गुणवत्ता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि हर घर तक सुरक्षित और पर्याप्त मात्रा में गैस पहुंच सके।
