53 मुस्लिम उम्मीदवारों ने मारी बाजी, टॉप-30 में तीन नाम
नई दिल्ली/लखनऊ : देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली Union Public Service Commission (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के नतीजों में इस बार मुस्लिम अभ्यर्थियों ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। जारी परिणामों के अनुसार कुल 958 सफल उम्मीदवारों में से 53 मुस्लिम उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। यह पिछले लगभग दस वर्षों में सबसे अधिक संख्या मानी जा रही है। इस बार कुल चयनित उम्मीदवारों में मुस्लिम अभ्यर्थियों की हिस्सेदारी करीब 5.53 प्रतिशत रही। हालांकि, यह संख्या आबादी के अनुपात से अभी भी कम मानी जाती है, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है।
टॉप-30 में तीन मुस्लिम उम्मीदवार
इस साल परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है। वहीं मुस्लिम उम्मीदवारों में ए आर रजा मोहीउद्दीन सबसे आगे रहे।जिन्होंने ऑल इंडिया रैंक-7 हासिल की। इसके अलावा इफरा शम्श अंसारी ने रैंक 24, नाबिया परवेज ने रैंक 29 ने भी टॉप-30 में जगह बनाई है। खास बात यह है कि 2024 के परिणामों में टॉप-30 में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं था, जबकि इस बार तीन उम्मीदवारों ने जगह बनाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस बार सफल 53 मुस्लिम उम्मीदवारों में 13 महिलाएं भी शामिल हैं। इसे शिक्षा और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बढ़ती भागीदारी का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
कुल पद और श्रेणीवार चयन
सिविल सेवा परीक्षा 2025 के तहत कुल 1087 पदों को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे।।इसमें चयनित उम्मीदवारों में विभिन्न श्रेणियों का वितरण इस प्रकार है।।जिसमें सामान्य वर्ग (GEN)-317 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)-104, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)-306, अनुसूचित जाति (SC)- 158 अनुसूचित जनजाति (ST)-73 हैं। इसी परीक्षा के माध्यम से Indian Administrative Service (IAS), Indian Foreign Service (IFS) और Indian Police Service (IPS) समेत कई केंद्रीय सेवाओं में नियुक्तियां की जाती हैं।
IAS, IPS और अन्य सेवाओं के लिए रिक्तियां
आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार इस वर्ष प्रमुख सेवाओं के लिए सीटें इस प्रकार थीं। इसमें IAS के लिए 180 पद, IFS के लिए 55 पद, IPS के लिए 150 पद, केंद्रीय सेवाएं (Group-A)- 507 पद, केंद्रीय सेवाएं (Group-B)- 195 पद हैं। इन सभी पदों पर अंतिम चयन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर किया जाता है।
पिछले दस सालों के आंकड़े
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2016 से 2025 के बीच सिविल सेवा परीक्षा में सफल मुस्लिम उम्मीदवारों का प्रतिशत सामान्यतः 2 से 6 प्रतिशत के बीच रहा है। इसमें वर्ष 2025 में कुल 958 में से 53 कैंडिडेट चयनित हुए हैं। यह 5.53 फीसद है। इसी तरह से 2024 में 1009 में से 30 मुस्लिम चयनित हुए थे। यह 2.97 फीसद है। वर्ष 2023 में 1016 में 50 चयनित हुए थे, एयर यह 4.9 फीसद, वर्ष 2022 में 933 में 29 मुस्लिम, जो 3.21फीसद, वर्ष 2021 में 685 में से 25 मुस्लिम, जो 3.64 फीसद, वर्ष 2020 में 761 में से 31 मुस्लिम, जो 4.07 फीसद, वर्ष 2019 में 829 में से 44 मुस्लिम, जो 5.3 फीसद, वर्ष 2018 में 759 में से 28 मुस्लिम, जो 3.68 फीसद, वर्ष 2017 में 980 में से 50 मुस्लिम, 5.1 फीसद, वर्ष 2016 में 1099 में से 52 मुस्लिम, जो 4.73 फीसद हैं।
आबादी के अनुपात पर लगातार उठते रहे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि देश की आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 14–15 प्रतिशत है, जबकि सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का प्रतिशत अभी भी एक अंक में ही रहता है। ऐसे में शिक्षा, कोचिंग सुविधाओं और आर्थिक संसाधनों की उपलब्धता को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है।फिर भी 2025 का परिणाम उम्मीद जगाने वाला, हालांकि, चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन 2025 के परिणामों में मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या का बढ़ना और टॉप-30 में तीन नामों का शामिल होना कई युवाओं के लिए प्रेरणा माना जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसी तरह तैयारी और अवसर बढ़ते रहे तो आने वाले वर्षों में सिविल सेवाओं में विविधता और प्रतिनिधित्व और मजबूत हो सकता है।
