बरेली : यूपी के बरेली देहात के भमोरा थाना क्षेत्र के ग्राम कुड्डा में 1 नवंबर, 2018 को लाठी डंडों से हुई मारपीट की घटना ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली है। मृतक के पुत्र अनुज कुमार की तहरीर के मुताबिक पिता मेहरबान दुकान से चीनी लेने जा रहे थे, तभी गांव के ही राजवीर, उसके बेटे अवधेश, कल्लू और ओमपाल ने उनसे गाली-गलौज शुरू कर दी। उन्होंने विरोध किया, तो आरोपियों ने लाठी-डंडों और लात-घूंसों से मेहरबान की बेरहमी से पिटाई कर दी। इलाज के दौरान मेहरबान की मौत हो गई। जिसके चलते एडीजे तबरेज अहमद ने केस की सुनवाई की। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी पिता और उसके दो पुत्रों को उम्रकैद, और 50-50 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
बीच-बचाव में बेटे पर भी हमला
शोर सुनकर मेहरबान का बेटा अनुज कुमार अपने पिता को बचाने पहुंचा, लेकिन आरोपियों ने उसके साथ भी मारपीट की। गांव के लोगों ने डायल-100 को सूचना दी। जिसके चलते पुलिस की मदद से मेहरबान को पहले सीएचसी भमोरा, और इसके बाद जिला अस्पताल बरेली रेफर किया गया। मगर, यहां इलाज के दौरान मेहरबान की मौत हो गई।
एनसीआर के बाद दर्ज की एफआईआर
पहले इस मामले में मारपीट की धाराओं में एनसीआर दर्ज की गई थी। मगर, इलाज के दौरान मेहरबान की मौत हो गई। इसके बाद थाना भमोरा में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर सहित शरीर पर गंभीर चोटों की पुष्टि हुई, जिन्हें मौत का कारण माना गया।
कोर्ट में क्या साबित हुआ?
ट्रायल के दौरान गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट और जांच से यह साबित हुआ कि आरोपियों ने पूर्व नियोजित योजना के तहत मेहरबान पर हमला किया था। अदालत ने माना कि लाठी -डंडों से सिर पर की गई चोटें जानलेवा थीं और आरोपियों को अपने कृत्य के परिणामों का ज्ञान था।
एडीजे तबरेज अहमद का सराहनीय फैसला
एडीजे तबरेज अहमद की अदालत ने तीन आरोपियों राजवीर, उसके पुत्र अवधेश और कल्लू को दोषी ठहराया। अदालत ने इन्हें आजीवन सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त कारावास का आदेश भी दिया गया। इसके साथ ही पहले भी एडीजे तबरेज अहमद कई मामलों में दोष सिद्ध होने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुना चुके हैं।
पीड़ित परिवार को मुआवज़ा
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत जुर्माने की पूरी रकम मृतक के बेटे अनुज कुमार को मुआवज़े के रूप में देने का आदेश दिया, ताकि उसे हुई मानसिक पीड़ा और क्षति की भरपाई हो सके।
