लखनऊ : राजधानी स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (PGI) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट वर्ष 2018 से 2024 के बीच रात के समय लाए गए घायलों के आंकड़ों पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में घायल होकर आने वाले हर दूसरे व्यक्ति ने शराब का सेवन किया हुआ था। इतना ही नहीं, दोपहिया वाहन चालकों में केवल एक तिहाई ने ही हेलमेट पहना था, जबकि चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट लगाने वालों की संख्या भी महज 41 फीसदी पाई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, शराब पीकर गाड़ी चलाना और सुरक्षा नियमों की अनदेखी रात में दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है।
3705 घायलों पर अध्ययन, सिर की चोट के मामले सबसे ज्यादा
यह अध्ययन पीजीआई के डॉक्टर डॉ. ए.के. सिंह और डॉ. पी.के. मिश्रा द्वारा किया गया, जिसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में कुल 3,705 घायलों को शामिल किया गया। इनमें से 67.3 फीसदी मामले सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े थे, जिनमें 84.7 फीसदी दोपहिया वाहन दुर्घटनाएं थीं। घायलों में 78.3 फीसदी पुरुष थे और औसत आयु 37.5 वर्ष दर्ज की गई। सबसे ज्यादा 44.5 फीसदी मामलों में सिर में गंभीर चोट पाई गई।
रफ्तार और लापरवाही बनी जानलेवा, 4 फीसदी की हुई मौत
रिपोर्ट के अनुसार 58.4 फीसदी मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा और 45.8 फीसदी को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ी। कुल मृत्यु दर 4 फीसदी रही, जिसमें से 42.2 फीसदी मौतें भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर हो गईं। वहीं, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वैभव जायसवाल का कहना है कि तेज रफ्तार, शराब और जागरूकता की कमी दुर्घटनाओं की मुख्य वजह हैं। उन्होंने एक्सप्रेसवे के साथ ट्रॉमा सेंटरों की संख्या बढ़ाने और लोगों को सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने की जरूरत बताई।
