बरेली : यूपी के बरेली में 1971 के युद्ध के बाद एक बार फिर अंधेरे में डूबा दिखा देखा। यह दृश्य कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि गृह मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित सिविल डिफेंस की मॉक ड्रिल का हिस्सा था। शहर में रात 8:00 बजे से शुरू हुए इस ब्लैक आउट अभ्यास में पूरे शहर की बिजली 10 मिनट के लिए बंद रही। जिससे लोगों को युद्ध जैसी स्थिति का अहसास हुआ और साथ ही आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एक व्यावहारिक अनुभव भी मिला।
शहर के प्रमुख इलाके अंधेरे में डूबे

कुतुबखाना, सैटेलाइट, कोतवाली, सिविल लाइंस, स्टेडियम रोड और रेलवे जंक्शन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बिजली बंद होते ही गहराता अंधकार नजर आया। नागरिकों ने बड़ी संजीदगी और जिम्मेदारी के साथ अपने घरों, दुकानों, प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों की लाइटें समय से बंद कर देशहित में सहयोग किया।
पुलिस और प्रशासन रहे मुस्तैद

ब्लैक आउट के दौरान शहर की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा कई इलाकों में ट्रैफिक को रोका गया। मालियों की पुलिया, स्टेडियम रोड जैसे क्षेत्रों में थोड़ी देर के लिए जाम की स्थिति बनी, लेकिन प्रशासन ने समय पर नियंत्रण पा लिया।
आईवीआरआई परिसर बना मॉक ड्रिल का केंद्र
इस दौरान आईवीआरआई (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान) परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें युद्ध अथवा आपदा से निपटने की तैयारी की गई। इस आयोजन में मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की उपस्थिति और जिलाधिकारी अविनाश सिंह के नेतृत्व में एनसीसी कैडेट्स, छात्र-छात्राएं, फायर ब्रिगेड, मेडिकल टीम, सिविल डिफेंस स्वयंसेवक और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर आपात स्थिति में अनुशासित, संगठित और त्वरित प्रतिक्रिया का अभ्यास किया।
आपात स्थिति में क्या करें, विशेषज्ञों ने दी सलाह
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी कि पहचान पत्र, जमीन के कागजात, बैंक दस्तावेज आदि एक बैग में रखें।इसके साथ ही प्राथमिक चिकित्सा किट, सूखा राशन, पानी, टॉर्च, बैटरियां और नकद राशि तैयार रखें, मोबाइल और पावर बैंक हमेशा चार्ज रखें, केवल सरकारी समाचार स्रोतों से जानकारी लें, निकासी की स्थिति में बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए अलग योजना बनाएं।
यह बिल्कुल न करें
अफवाहों पर यकीन न करें, बिना पुष्टि की जानकारी न फैलाएं,बिना योजना के घर से बाहर न निकलें, संदिग्ध वस्तुओं को न छुएं, तुरंत प्रशासन को सूचना दें। अनुशासनहीनता से बचें, क्योंकि, एक चूक जानलेवा हो सकती है
जनसहभागिता से मिली सफलता
यह मॉक ड्रिल जहां एक ओर नागरिकों को युद्ध जैसी आपदा का वास्तविक अनुभव कराती है, तो वहीं दूसरी ओर उन्हें जागरूक, सतर्क और आत्मनिर्भर बनाती है। प्रशासन, सुरक्षाबल और नागरिकों के सहयोग से यह अभ्यास पूर्ण रूप से सफल रहा, और भविष्य में किसी भी संकट से निपटने के लिए तैयार रहने का संदेश देकर गया।
