नई दिल्ली : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक वीडियो को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद बढ़ गया है। इस वीडियो में मुख्यमंत्री को बंदूक लेकर विशेष समुदाय की ओर निशाना साधते हुए दिखाया गया है, जिससे राज्य और देश भर में चिंता और चर्चा शुरू हो गई है।
इस वीडियो को लेकर माकपा और सीपीआई के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि इस मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और वीडियो के सचाई और इसके संभावित असर की जांच हो। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस तरह का वीडियो समाज में तनाव और मतदाताओं के बीच डर फैलाने वाला हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर ध्यान देते हुए कहा है कि यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं, राजनीतिक मामलों का एक हिस्सा अदालतों में भी लड़ा जाने लगता है। उन्होंने कहा कि अदालत राजनीतिक और संवैधानिक सीमाओं का पालन करते हुए ही मामले की जांच करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह वीडियो अब चुनावी चर्चा का हिस्सा बन चुका है और विभिन्न दल इसका राजनीतिक फायदा और नुकसान दोनों देखने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, नागरिक समाज और मीडिया भी इस मुद्दे पर गहन बहस कर रहे हैं। असम सरकार ने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगियों का कहना है कि वीडियो का संदर्भ और वास्तविकता अदालत में सामने आने पर ही स्पष्ट होगा। पुलिस और संबंधित अधिकारी भी मामले की जांच और वीडियो के स्रोत की पुष्टि करने में जुटे हैं।
