सिलचर-असम : मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में पांच फरवरी को हुए कोयला खदान विस्फोट की दुखद घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। असम के अस्पताल में इलाज के दौरान दो और मजदूरों ने दम तोड़ दिया। मंगलवार (10 फरवरी) को अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। मृतकों में असम के कछार जिले के कटिगोराह निवासी रामचंद्र बैष्णब और निमारुद्दीन शामिल हैं।
इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि पांच फरवरी को हुए विस्फोट में कुल नौ मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिन्हें सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (एसएमसीएच) में भर्ती कराया गया था। अब तक इलाज के दौरान दो और लोगों की मौत होने के बाद कुल मृतकों की संख्या 30 तक पहुंच गई है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक और तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।
विस्फोट स्थल मिसिंगेट-थांग्स्को इलाके में म्यंसंगट गांव की कोयला खदान है। घटना के बाद राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं ताकि विस्फोट के कारणों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और इसमें सुरक्षा प्रोटोकॉल और खदान संचालन की जांच की जाएगी।
इस हादसे के बाद असम सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। वहीं खदान में विस्फोट के बाद बड़े स्तर पर खोज और बचाव अभियान चलाया गया। इसमें राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस, जिला प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवक शामिल थे। कई दिनों तक जारी इस अभियान में सभी शव बरामद किए गए। यह हादसा उस समय हुआ जब कई मजदूर खदान में काम कर रहे थे। विस्फोट के कारण खदान के अंदर बड़ी तबाही मची और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने बताया कि घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन खदान की जटिल संरचना के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन कई दिनों तक चला।
पर्यावरण और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस घटना को अवैध और जोखिमपूर्ण खनन की चेतावनी करार दिया है। उल्लेखनीय है कि 2014 में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने मेघालय में अवैध कोयला खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन इसके बावजूद कई जिलों से लगातार अवैध खनन की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस तरह की खदानों में सुरक्षा मानकों का पालन न होना अक्सर इस प्रकार के हादसों का कारण बनता है। मृतकों के परिजनों और स्थानीय समुदाय में गहरा शोक है। प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित परिवारों को हर तरह का सहारा देने में जुटी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हादसे ने न केवल मानव जीवन को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि यह खदानों की सुरक्षा, कानून और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी उजागर करता है।
