लखनऊ : उत्तर प्रदेश में गुमशुदा लोगों की तलाश को लेकर हाईकोर्ट ने प्रशासन पर कड़ा रुख अपनाया है। लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए ब्योरे को देखकर अपर मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से निजी हलफनामे पर जवाब मांगा है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई पर दोनों अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष पेश होंगे। कोर्ट ने पूछा कि गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए कौन-कौन सी प्रक्रिया अपनाई जाती है और दो साल में एक लाख से अधिक गुमशुदा लोगों की तलाश में विफलता की वजह क्या है। कोर्ट ने निर्देश दिए कि अगर कोई मानक कार्यप्रणाली (SOP) नहीं है, तो इसे शीघ्र तैयार किया जाए। इस याचिका की शुरुआत चिनहट निवासी विक्रमा प्रसाद ने की थी। उनके 32 वर्षीय पुत्र जुलाई 2024 में गुम हो गए थे और उन्होंने पुलिस से तलाश के निर्देश देने का अनुरोध किया था।
कोर्ट ने पिछले हलफनामे का हवाला देते हुए बताया कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच प्रदेश में 1,08,300 गुमशुदा लोगों की शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन सिर्फ 9,000 लोगों की तलाश की गई। अदालत ने इसे जनहित का मामला बताते हुए “इन-री मिसिंग पर्सन्स इन दि स्टेट” शीर्षक से जनहित याचिका दर्ज करने और 5 फरवरी को समुचित खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
