नई दिल्ली : कर्तव्य पथ पर सैन्य झांकियों के भव्य प्रदर्शन के बाद जैसे ही सांस्कृतिक झांकियों की शुरुआत हुई, पूरा वातावरण भारतीय विविधता और गौरव से सराबोर हो गया। एक के बाद एक निकलती झांकियों ने भारत की प्राचीन परंपराओं से लेकर आधुनिक विकास तक की यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। दर्शकों की निगाहें हर झांकी पर ठहर गईं और तालियों की गूंज से कर्तव्य पथ बार-बार गूंज उठा।
सबसे पहले आयुष मंत्रालय की झांकी प्रस्तुत की गई, जिसमें भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक उपचार को दर्शाया गया। इस झांकी ने संदेश दिया कि भारत न केवल आधुनिक चिकित्सा में आगे है, बल्कि अपनी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली के बल पर भी विश्व को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखा रहा है। इसके बाद कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय की झांकी निकली, जिसमें युवाओं के हुनर, स्टार्टअप संस्कृति और आत्मनिर्भर भारत की झलक साफ दिखाई दी।

छत्तीसगढ़ की झांकी ने डिजिटल विकास के साथ-साथ राज्य के बलिदानियों के प्रति सम्मान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। आधुनिक तकनीक और वीरता का यह संगम दर्शकों को खासा प्रभावित करता नजर आया। इसके बाद गृह मंत्रालय की झांकी में भारतीय न्याय संहिता के लागू होने और गुलामी की मानसिकता को समाप्त करने के संकल्प को प्रदर्शित किया गया, जिसने एक सशक्त और न्यायपूर्ण भारत की तस्वीर पेश की।
उत्तर प्रदेश की झांकी में राज्य के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रतीकों को उकेरा गया। इसके बाद पंजाब की झांकी निकली, जिसमें गुरु तेग बहादुर के बलिदान और उनके योगदान को श्रद्धांजलि दी गई। गुरुद्वारे की प्रतिकृति के माध्यम से पंजाब की आध्यात्मिक शक्ति और त्याग की परंपरा को प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया। पंजाब के बाद हिमाचल प्रदेश की झांकी ने राज्य के शूरवीरों को नमन किया और पहाड़ी संस्कृति की सुंदर झलक पेश की। जम्मू-कश्मीर की झांकी में राज्य की समृद्ध संस्कृति, कृषि और विशेष रूप से केसर की खेती को प्रमुखता से दर्शाया गया। इसके बाद एनडीआरएफ की झांकी ने आपदाओं से निपटने में देश की बढ़ती क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को दिखाया। शिक्षा मंत्रालय की झांकी में पीएम श्री स्कूल योजना को परिलक्षित किया गया, जो भविष्य की पीढ़ी के निर्माण का प्रतीक बनी।
विद्युत मंत्रालय की झांकी में स्मार्ट पावर और स्मार्ट होम की थीम के जरिए आधुनिक ऊर्जा व्यवस्था को दर्शाया गया। मध्य प्रदेश की झांकी में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर को नमन करते हुए उनके योगदान को रेखांकित किया गया। ओडिशा की झांकी की थीम “परंपरा से प्रगति” रही, जिसमें महिला विकास और सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में राज्य की भूमिका को दिखाया गया। मणिपुर की झांकी ने जैविक खेती को, जबकि राजस्थान की झांकी ने दस्तकारी और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया।
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और संस्कृति मंत्रालय की झांकियों में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर को खास तौर पर दर्शाया गया। मातृभूमि के प्रति प्रेम और राष्ट्रीय एकता का भाव हर दृश्य में झलकता रहा। इस अवसर पर कर्तव्य पथ पर एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई, जिसमें पूरे भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरोकर पेश किया गया, जिसे देखकर दर्शक अभिभूत हो उठे। सेना की डेयर डेविल टीम ने हैरतअंगेज करतब दिखाकर रोमांच बढ़ा दिया। वायुसेना के विमानों सी-295, सी-130, सुखोई और राफेल की गगनभेदी उड़ानों ने आसमान में शक्ति और शौर्य का प्रदर्शन किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ परेड का समापन हुआ और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तथा विदेशी अतिथियों के प्रस्थान के साथ यह ऐतिहासिक समारोह संपन्न हुआ।
