बरेली: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट की घटना से आहत होकर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में प्रयागराज माघ मेले के दौरान हुई घटना का जिक्र करते हुए इसे सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा जारी गजट में रॉलेट एक्ट- 1919 जैसे यूजीसी रेग्युलेशन 2026 से आहत होकर उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा से त्यागपत्र देने बात कही। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से आईआईटी, और बीएचयू से बीटेक की उपाधि प्राप्त की है। जिसके लिए महामना मदम मोहन मालवीय का जिंदगी भर आभारी रहने की बात कही है। इस मामले में पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री से The justice HINDI को इस्तीफा देने की बात कही।
माघ मेले की घटना बनी इस्तीफे की वजह
पत्र में अलंकार अग्निहोत्री ने लिखा कि माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किया गया और उनकी चोटी तक पकड़ ली गई, जिससे उन्हें गहरा आघात पहुंचा। इसी कारण उन्होंने प्रशासनिक पद पर बने रहना उचित नहीं समझा। उनके त्यागपत्र के फोटो और लेटर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
आईटी सेक्टर से प्रशासनिक सेवा तक का सफर
अलंकार अग्निहोत्री 2016 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं और उन्होंने परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल की थी। प्रशासनिक सेवा में आने से पहले वे करीब 10 साल तक आईटी सेक्टर में कार्य कर चुके हैं।
मौनी अमावस्या पर हुआ था विवाद
जानकारी के मुताबिक 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने को कहा, जिस पर विरोध हुआ और शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की स्थिति बन गई। पुलिस द्वारा पालकी को हटाने के बाद शंकराचार्य अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे।
प्रशासन ने जारी किए थे नोटिस
घटना के बाद प्रशासन की ओर से दो नोटिस जारी किए गए थे। पहले नोटिस में शंकराचार्य की उपाधि के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाया गया, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन हुए हंगामे पर जवाब मांगा गया। साथ ही माघ मेले से प्रतिबंध की चेतावनी भी दी गई थी, जिनका शंकराचार्य ने जवाब दिया था।
शिविर में घुसने की कोशिश, नारेबाजी का आरोप
24 जनवरी की रात कुछ युवकों के एक समूह द्वारा शंकराचार्य के शिविर में घुसने की कोशिश का मामला भी सामने आया। बताया गया कि युवक नारेबाजी करते हुए अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे, जिस दौरान शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई। इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ा विरोध जताते हुए संघर्ष जारी रखने की बात कही थी।
