बरेली : देशव्यापी प्रतिरोध दिवस के मौके पर बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन से जुड़े संगठनों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति महोदया को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में चार नए लेबर कोड वापस लिए जाने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई। यूनियनों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर बनाए गए चार लेबर कोड, मज़दूरों के दशकों लंबी लड़ाई से हासिल अधिकारों को कमजोर कर देंगे।
“Hire and Fire को वैध बनाने की कोशिश”: संजीव मेहरोत्रा का हमला

फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा “सरकार इसे Ease of Doing Business बता रही है, जबकि असल उद्देश्य है Hire and Fire को वैध करना।”उन्होंने आरोप लगाया कि नये कोड पूरी तरह नियोक्ताओं के पक्ष में हैं। मज़दूरों की नौकरी की सुरक्षा खत्म हो जाएगी। यूनियनें कमजोर होंगी। हड़ताल के अधिकार पर भारी प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। शांतिपूर्ण हड़ताल भी अब अपराध मानी जा सकती है।
“ठेका प्रथा को संस्थागत वैधता मिल गई”- डॉ. अंचल अहेरी
कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अंचल अहेरी ने चिंताएं गिनाईं “नई कोड्स से कंपनियां अल्पकालिक अवधि के लिए मजदूर रखकर अनुबंध पूरा होते ही निकाल देंगी… यह ठेका प्रथा को वैधता देने वाला कदम है।”
“मज़दूरों को दोबारा गुलामी की ओर धकेले जाने की साजिश”: हरगोविंद
इंकलाबी मजदूर केंद्र के हरगोविंद ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “यह लेबर कोड मजदूरों को गुलामी के दौर में धकेलने वाले दस्तावेज़ हैं।”उन्होंने कहा कि यूनियन बनाने का अधिकार खत्म हो रहा है। शांतिपूर्ण हड़तालों पर भी जुर्माने और सजा। PF न जमा करने पर नियोक्ता को हल्की कार्रवाई, नुकसान कर्मचारियों का है। जिला स्तर के लेबर कोर्ट खत्म, न्याय और दूर हो जाएगा। ठेका मजदूरों का प्रतिशत 28% तक पहुंचा, अब हालत और बदतर है। उपाध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने कहा है कि “ठेका मजदूरों की संख्या 15.5% से बढ़कर 27.9% हो गई है… नए लेबर कोड से शोषण और बढ़ेगा।”
“देश के 93% मजदूर लेबर कोड से बाहर, बेरोज़गारी बढ़ेगी”: मोहम्मद फैसल
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के मोहम्मद फैसल ने बताया कि फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट खत्म होते ही मजदूर स्वतः बेरोजगार 300 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियां मनमाने ढंग से छंटनी करेंगी। देश के 93% मज़दूर लेबर कोड से बाहर हो जाएंगे। असंगठित क्षेत्र के 567 मिलियन मजदूर अंधकार में धकेल दिए गए”। शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हरि शंकर ने कहा कि “प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जवाबदेही खत्म… असंगठित क्षेत्र के 567 मिलियन मजदूरों के भविष्य पर ताला लग गया है।”
“20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में PF खत्म-मजदूरों की सुरक्षा छिनी”
मार्केट वर्कर्स यूनियन के मोहित देवल ने कहा है कि PF अब केवल 20+ कर्मचारियों वाले संस्थानों में अनिवार्य हों। इससे लाखों छोटे उद्योगों के मजदूर सामाजिक सुरक्षा से बाहर
“किसान-मजदूर एकता ही इन कोड्स को रोक सकती है”-हिमांशु
क्रांतिकारी किसान मंच के हिमांशु ने कहा है कि “लेबर कोड मजदूर विरोधी हैं… और किसान–मजदूर की मजबूत एकजुटता ही इन्हें रोक सकती है।” ज्ञापन देने के दौरान राजेंद्र सिंह, हरगोविंद, मोहित देवल, संजीव मेहरोत्रा, जितेंद्र मिश्रा, हिमांशु, हरि शंकर, निशा, सतीश सिंह, एडवोकेट यशपाल, एडवोकेट टी.डी. भास्कर, सर्वेश मौर्य, कैलाश, बालकराम, उमेश, ईश्वर चंद सहित कई संगठन शामिल रहे।
