नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। करीब 39 दिनों तक चले संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर राहत की उम्मीद जगाई है, हालांकि हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं माने जा रहे हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश की सभी सैन्य इकाइयों को तत्काल प्रभाव से फायरिंग रोकने का आदेश दिया है। यह निर्देश राज्य संचालित प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग के माध्यम से जारी किया गया। अपने संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह युद्ध का अंत नहीं है, बल्कि एक अस्थायी विराम है, जिसका उद्देश्य आगे की रणनीतिक बातचीत को संभव बनाना है। उन्होंने सभी सैन्य शाखाओं को आदेश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि युद्धविराम के साथ ही ईरान ने कड़ा रुख भी अपनाया है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने चेतावनी दी है कि यह कदम किसी भी तरह से युद्ध की समाप्ति का संकेत नहीं है। परिषद ने कहा कि यदि अमेरिका या इस्राइल की ओर से कोई भी उकसावे वाली कार्रवाई होती है, तो उसका जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा। बयान में यह भी कहा गया कि ईरान पूरी तरह सतर्क है और उसकी सैन्य तैयारियां बरकरार हैं।
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर सैन्य कार्रवाई की थी। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़े और कई क्षेत्रों में हिंसा फैल गई। इस दौरान कई देशों में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई थी। ईरान ने अपने नागरिकों के बलिदान को याद करते हुए दावा किया है कि उसने युद्ध के अधिकांश लक्ष्यों को हासिल कर लिया है और विरोधी पक्ष को कड़ा जवाब दिया है।
कूटनीतिक स्तर पर भी दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत जारी रही। अमेरिका की ओर से 15-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसके जवाब में ईरान ने 10-सूत्रीय प्रस्ताव रखा। ईरान ने साफ किया है कि इन शर्तों पर सहमति बनने के बाद ही वह युद्ध को समाप्त मानने के लिए तैयार होगा। इन प्रस्तावों में क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रतिबंधों में ढील और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार तड़के युद्धविराम की घोषणा की। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता बताया और कहा कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर चुका है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अब ध्यान दीर्घकालिक शांति समझौते पर केंद्रित किया जाएगा, जिसके लिए अगले दो हफ्ते बेहद अहम होंगे। हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह, सुरक्षित और तत्काल प्रभाव से खोलना होगा। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि युद्धविराम केवल एक शुरुआती कदम है। दोनों पक्षों के बीच अविश्वास अब भी बना हुआ है और किसी भी छोटी घटना से स्थिति फिर से बिगड़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और उम्मीद कर रहा है कि आने वाले दिनों में बातचीत के जरिए स्थायी शांति का रास्ता निकलेगा। फिलहाल, दो हफ्तों का यह युद्धविराम एक राहत जरूर लेकर आया है, लेकिन असली चुनौती इसे स्थायी शांति में बदलने की है।
